इन दिनों मूंगफली व बाजरे की बम्पर आवक हो रही है। सरकार बाजरे को तो समर्थन मूल्य पर नहीं खरीद रही है, मूंगफली खरीदेगी, लेकिन तब तक किसान फसल बेच चुके होंगे।
बस्सी। क्षेत्र में इन दिनों मूंगफली व बाजरे की बम्पर आवक हो रही है। सरकार बाजरे को तो समर्थन मूल्य पर नहीं खरीद रही है, मूंगफली खरीदेगी, लेकिन तब तक किसान फसल बेच चुके होंगे।
किसानों को मूंगफली को मण्डी या व्यापारियों को औने-पौने दामों में बेचना पड़ रहा है। बाजरा, ग्वार की कटाई व मूंगफली की खुदाई के अंतिम दौर में है। वहीं बारिश होने से किसान अब खेतों में सरसों, चना, जौ व गेहूं की बुवाई कर रहे हैं।
किसानों को बुवाई के लिए खाद, बीज व कीटनाशक के लिए रकम की जरूरत पड़ रही है। इसके लिए किसान खरीफ फसलों को बेच रहे है। वहीं आगामी दिनों में दीपावली पर्व को लेकर भी रुपयों की जरूरत है।
बारिश ने बिगाड़ा रंग
बाजरे की कटाई व मूंगफली की खुदाई के समय बारिश हो गई थी। इससे बाजरा और मूंगफली काली पड़ गए। ऐसे में मण्डी में काले व खराब बाजरे के किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहा है। इसी प्रकार मूंगफली के भी यही हाल है। समर्थन मूल्य खरीद केन्द्र पर मूंगफली की गुणवत्ता देखी जाती है। जबकि बारिश में खराब मूंगफली का समर्थन मूल्य केन्द्र पर बिकना मुश्किल होगा। ऐसे में किसानों के सामने परेशानी बढ़ती जा रही है।
मूंगफली की खरीदारी के अभी तक कोई आदेश नहीं आए हैं, लेकिन 1 नवम्बर से समर्थन मूल्य पर खरीदारी की सम्भावना है।
-शशिकांत शर्मा, लेखाकार क्रय विक्रय सहकारी समिति बस्सी