Ullas Mahapariiksha: बस्तर जिले में अशिक्षा की चुनौती को पार करते हुए शिक्षा की ओर एक नया कदम उठाया गया है। उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' के तहत आयोजित महापरीक्षा ने जिले में शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत की है।
Ullas Mahapariiksha: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अशिक्षा की चुनौती को पार करते हुए शिक्षा की ओर एक नया कदम उठाया गया है। 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' के तहत आयोजित महापरीक्षा ने जिले में शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत की है।
इस कार्यक्रम के तहत 25 हजार से ज्यादा परीक्षार्थियों ने भाग लिया, जिनमें बुजुर्ग, युवा, कैदी, और आत्मसमर्पित माओवादी भी शामिल थे। यह महापरीक्षा केवल एक शैक्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन सपनों को फिर से जीवित करने की कोशिश है जो शिक्षा से दूर रह गए थे।
बस्तर जिले के कलेक्टर आकाश छिकारा के नेतृत्व में आयोजित इस महापरीक्षा में 25,706 परीक्षार्थियों ने भाग लिया। इसके लिए कुल 812 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। यह परीक्षा उन लोगों के लिए एक नई शुरुआत साबित हुई है, जिन्होंने किसी कारणवश शिक्षा का सामना नहीं किया था। कलेक्टर आकाश छिकारा ने इस कार्यक्रम को न केवल साक्षरता बढ़ाने का एक प्रयास बताया, बल्कि इसे आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के निर्माण का भी एक कदम माना।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन बुजुर्गों और युवाओं के लिए था, जिन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी नहीं की थी। महापरीक्षा के जरिए बस्तर के हर वर्ग को शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया, जिससे उन्हें यह एहसास हुआ कि कोई भी उम्र हो, शिक्षा का रास्ता कभी बंद नहीं होता। यह महापरीक्षा सिर्फ एक शैक्षिक परीक्षण नहीं थी, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की ओर बढ़ता हुआ कदम था।
महापरीक्षा की एक खास बात यह थी कि इसमें सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि जेल में बंदी और मुख्यधारा में लौट चुके पूर्व माओवादी भी शामिल हुए। केंद्रीय कारागार जगदलपुर में बंद 94 पुरुष और 47 महिला बंदियों ने इस परीक्षा में भाग लिया, जबकि 28 आत्मसमर्पित माओवादी भी परीक्षा में शामिल हुए। यह बात इस ओर इशारा करती है कि बस्तर में शिक्षा की लहर अब हर वर्ग तक पहुंच चुकी है और हर कोई अपने भविष्य को संवारने के लिए तत्पर है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बस्तर जिले की साक्षरता दर करीब 57 प्रतिशत थी, लेकिन राज्य सरकार और सामाजिक जागरूकता के प्रयासों ने इसे धीरे-धीरे सुधारने में मदद की है। महापरीक्षा के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि जिले की साक्षरता दर में और अधिक सुधार होगा। यह महापरीक्षा बस्तर की बदलती तस्वीर का प्रतीक बन गई है, जहां अब शिक्षा के माध्यम से लोगों के सपने पूरे हो रहे हैं।
यह महापरीक्षा केवल एक शैक्षिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह बस्तर की बदलती तस्वीर को दर्शाती है। अब बस्तर में बंदूक की जगह किताब और कलम की ताकत से भविष्य के सपने साकार हो रहे हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि जब समाज का हर वर्ग शिक्षा के साथ जुड़ता है, तो विकास की दिशा अपने आप बन जाती है।
बस्तर में उठी यह साक्षरता की लहर यह संदेश देती है कि शिक्षा केवल अधिकार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभर रही है। जब समाज का हर वर्ग शिक्षा से जुड़ता है, तो वह अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाता है और बदलाव की राह खुद बन जाती है।
इस महापरीक्षा के आयोजन ने बस्तर को एक नई दिशा दिखाई है। अब यह सुनिश्चित हो गया है कि बस्तर का हर नागरिक, चाहे वह युवा हो, बुजुर्ग हो, कैदी हो या आत्मसमर्पित माओवादी हो, वह शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को बदलने की ताकत रखता है। शिक्षा अब बस्तर में सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि एक हकीकत बन चुकी है।