
Tiger Reserve: नक्सलियों के सफाए के बाद पहली बार बस्तर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 50 साल बाद जल्दी ही सफारी शुरू होगी। साथ ही अचानकमार टाइगर रिजर्व में इसे शुरू किया जाएगा। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप विभागीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर विभिन्न कार्यो की समीक्षा की। इस दौरान कहा कि केवल बजट का व्यय नहीं, धरातल पर दिखने वाले कार्य करें। वन संरक्षण, कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि खर्च करने से नहीं प्रभावी और पारदर्शिता के साथ टीम भावना से काम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल खर्च करना उपलब्धि नहीं है। यह भी देखा जाए कि खर्च की गई से योजनाओं में कितने ठोस परिणाम प्राप्त हुए हैं। बैठक में एसीएस वन मनोज पिंगुआ, वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय के साथ ही अधिकारी उपस्थित थे।
वन मंत्री लगातार हो रही अवैध कटाई की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि जंगल एक दिन में नहीं कटता। इसे रोकने अवैध कटाई पर तत्काल कार्रवाई करने मजबूत सूचना तंत्र विकसित करें। यह इतना मजबूत होना चाहिए कि किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी सबसे पहले विभाग को मिले। अवैध वृक्ष कटाई किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। इसकी सूचना मिलते ही जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होेंने कहा कि वन और वन्यजीव हमारी अमूल्य प्राकृतिक धरोहरें हैं। इनके संरक्षण के साथ वनवासियों की आजीविका, विभागीय सुशासन और कार्यों की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने विभागीय एवं निविदा के माध्यम से कराए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सामान की खरीदी के बजाय कार्यों के वास्तविक परिणामों और उपयोगिता का मूल्यांकन किया जाए। खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता साथ बाजार दर से कम कीमत पर खरीदी गई सामग्री के गुणवत्ता की गंभीरता से जांच करें। किसी भी प्रकार के वित्तीय समायोजन अथवा अनियमित मिलने पर तत्काल समाप्त कर सभी खरीद निर्धारित नियमों और पारदर्शी से करें। अधिकारी फील्ड में जाकर देखे कि किस तरह का काम हो रहा है।
वन मंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से सामान्य स्थिति बहाल होने के साथ ही ईको-टूरिज्म की व्यापक संभावनाएं विकसित हुई हैं। इन क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म का विकास प्रकृति के अनुरूप किया जाए। पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक के उपयोग तथा सीमेंट-कंक्रीट आधारित संरचनाओं का उपयोग न्यूनतम रखने के निर्देश दिए। साथ ही कांकेर क्षेत्र में भालुओं के सुरक्षित पुनर्वास एवं रिलोकेशन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर वन्यजीवों के त्वरित बचाव के लिए सभी जिलों में रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।