बस्तर

Salary Bill Scam: बस्तर पुलिस में बड़ा वेतन घोटाला, डिजिटल सिग्नेचर कर सरकारी खजाने से 3.70 करोड़ की हेराफेरी

Bastar Police Salary Scam: डिजिटल सिग्नेचर और फर्जी वेतन देयकों के जरिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की। मामले में तीन कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है।
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Jul 01, 2026
Salary Bill Scam
बस्तर पुलिस में बड़ा वेतन घोटाला (Photo AI)

Bastar Salary Scam: बस्तर जिला पुलिस विभाग में करोड़ों रुपए के वेतन घोटाले का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एसपी ऑफिस की वेतन शाखा में पदस्थ तीन कर्मचारियों ने वेतन भुगतान प्रक्रिया में कूटरचना (फोर्जरी) कर करीब 3 करोड़ 40 लाख रुपए की शासकीय राशि कर गवत कर दिया। नियमित ऑडिट और तकनीकी परीक्षण में इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपी कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। न्यायालय ने तीनों को पुलिस रिमांड पर भेजने के निर्देश दिए हैं।

सरकारी पैसे की हेराफेरी

प्रारंभिक जांच के मुताबिक, शासकीय राशि की हेराफेरी का यह खेल पिछले आठ से नौ महीनों से लगातार चल रहा था। शासकीय ऑडिट के दौरान जब वेतन मद में दर्ज आधिकारिक भुगतान और ट्रेजरी से हुए वास्तविक भुगतान के आंकड़ों का मिलान किया गया, तो दोनों के बीच एक बड़ा अंतर नजर आया। इस विसंगति ने बड़े घोटाले का संदेह पैदा किया, जिसके बाद मामले की आंतरिक जांच शुरू की गई। जांच में वेतन शाखा में पदस्थ आरक्षक गिरीश राम, आरक्षक राजकुमार कतालम और डीएसएफ आरक्षक हेमंत मैथ्यू की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

भत्तों में हेरफेरी, कई खातों में भेजी रकम

जांच में यह बात सामने आई कि तीनों आरोपियों ने बस्तर पुलिस के वेतन देयकों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया। आरोपियों ने कर्मचारियों के विभिन्न भत्तों की राशि की सिस्टम में फर्जी तरीके से बढ़ा दिया। इसके बाद निर्धारित वेतन से कई गुना अधिक भुगतान वर्शाकर राशि अपने और अपने करीबियों के अलग-अलग बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसपार कर दी।

ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में करते थे बदलाव

इस पूरे महाघोटाले को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग किया। जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने आहरण एवं संवितरण अधिकारी यानी डीडीओ के डिजिटल हस्ताक्षर युक्त पेनड्राइव का गलत इस्तेमाल किया। डिजिटल सिग्नेचर तक पहुंच होने के कारण आरोपी बड़ी आसानी से वेतन संबंधी दस्तावेजों और वेतन शाखा के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया है। तकनीकी और वित्तीय जांच में 3.40 करोड़ रुपए की हेराफेरी के प्रमाण मिले हैं।

संदिग्ध बैंक खातों के रेकॉर्ड खंगाल रही टीम

साइबर और ऑडिट टीम सभी संदिग्ध बैंक खातों के रेकॉर्ड खंगाल रही है। मामले में आगे कुछ और कड़े खुलासे और गिरफ्तारियां संभव हैं। ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में बदलाव कर फर्जी भुगतान आदेश जारी करते रहे। यही वजह थी कि महीनों तक इस गंभीर गड़बड़ी का पता उच्च अधिकारियों को नहीं चल सका। अफसरों का मानना है कि यदि नियमित ऑडिट में यह विसंगति नहीं पकड़ में आती, तो शासकीय राशि की बात का यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता था।

खंगाले जा रहे बैंक रेकॉर्ड, आईटी एक्ट में केस दर्ज

बस्तर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि करोड़ों रुपए की यह गबन की गई राशि किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। तकनीकी विशेषज्ञों और साइबर टीम की मदद से बैंक लेनदेन, वेतन भुगतान प्रणाली (सॉफ्टवेयर) और संबंधित लॉक्स का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि यह केवल एक वित्तीय अनियमितता नहीं है, बल्कि डिजिटल दस्तावेजों की कूट-रचना और शासकीय प्रणाली की सुरक्षा में सेंधमारी का बेहद गंभीर मामला है।

Published on:
01 Jul 2026 03:03 pm