
उज्जवला योजना की सच्चाई ! गृहणियों के लिए बनी मुसीबत, रिफिलिंग की सुविधा नहीं, हुआ मोह भंग
जगदलपुर . प्रधानमंत्री की ग्रामीण महिलाओं को रसोई गैस सिलेंडर और चूल्हा देने की योजना से ग्रामीणों का मोह भंग होने लगा है। अंचल के सिलेंडर वितरक नियुक्त नहीं होने के चलते ग्रामीणों को रिफलिंग के लिए इन्हें भटकना पड़ रहा है। भारी मशक्कत के बावजूद भी सिलेंडरों की रिफिल नहीं हो पा रही है। इससे ग्रामीण गृहणियां फिर से चूल्हे में खाना पकाने की सोच रही हैं।
70 हजार गैस कनेक्शन देने का है लक्ष्य
गौरतलब है कि उज्जवला योजना के तहत जिला में वर्ष 2016-17 में 32 हजार और वर्ष 2017-18 में 70 हजार गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जिला कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार गत 23 अक्टूबर 2017 तक जिला में कुल 68 हजार लोगों को गैस कनेक्शन और चूल्हा वितरित किया जा चुका है। वहीं रिफिलिंग हेतु लोहण्डीगुड़ा, मारडूम, करपावंड, तोकापाल, बास्तानार, दरभा जैसे दूरस्थ स्थानों में ग्रामीण वितरक नियुक्त करने की बात भी कही जा रही है, पर ग्रामीण खाली सिलेंडर भरवा नहीं पा रहे हैं।
अंचल में रिफिलिंग को लेकर समस्या
इधर गैस चुल्हा मिलने के बाद गृहणियों के सामने रिफलिंग की समस्या आन खड़ी है। गृहणियों को गैस रिफिल कराने में चार-पांच दिन लग जाते हैं। अब हम गैस भरवाने जाए या मजदूरी करने समझ नहीं आता। एक बार गैस भरवाने में उन्हें कम से कम डेढ़ हजार रूपए की चपत लग जाती है, एेसे में वे फि र से लकड़ी चूल्हा अपनाने का मन बना रहे हैं।
इसलिए रिफिल में आ रही है परेशानी
खाद्य नियंत्रक अधिकारी कैलाश सोनवानी ने बताया कि उज्जवला योजना के तहत जिला में 11 ग्रामीण वितरण केन्द्र बनाए हैं, उसे बढ़ाकर 14 किया जा रहा है। मुख्य बात यह है कि जिला में दो तरह के सिलेंडर आ रहे हैं। टू वे तहत ट्रक में जितने सिलेंडर आ रहे हैं उतने खाली सिलेंडर एजेंसी वाले को गिनकर देना होता है, वहीं वन वे के तहत सिर्फ नए उज्जवला कनेक्शन वालों के लिए भरे सिलेंडर आ रहे है। इनके खाली सिलेंडरों के बदले में मांगी गई संख्या में भरे सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं इसलिए रिफिल में सभी जगह परेशानी आ रही है। जनवरी तक व्यवस्था सुधार ली जाएगी।