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छह माह तक वेस्ट को बनाया बेस्ट, बेचकर आई चेहरे पर मुस्कान, पढ़े कैसे बनाए वेस्ट को बेस्ट

कचरे का आधे से ज्यादा सामान का उपयोग हो जाता है। कुछ खाद बनाने में इसके साथ ही कागज, प्लास्टिक, बोतल आदि सभी किलो हिसाब से बिक जाते है।

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Jan 21, 2018

जगदलपुर . जहां एक आेर सरकार से लेकर हर कोई स्वच्छता की बाते कर रहा है वहीं दूसरी ओर स्लम सेंटर की 15 महिलाए न केवल शहर को स्वच्छ करने का काम कर रही है बल्कि कचरे का उपयोग भी कर रही है। समिति की महिलाओं ने बताया कि वह छह माह से इस सेंटर में काम कर रही है पर काम करने की असली खुशी कचरे से खाद बनने व उसके बिकने के बाद आई है। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने अब तक 50 किलों खाद बेच चुकी है।

बरसात के समय सबसे ज्यादा दिक्कत होती
खाद बनने में ढाई से तीन माह का समय लग जाता है। इसके लिए वह सबसे पहले शहर के कचरे को अलग-अलग करती है फिर इसके बाद कचरे में से सब्जी, फल जैसी चीजों को अलग कर निकालती हंै। इसके बाद खाद बनाने वाली जगह पर इन सभी चीजो को डालकर खाद बनाने की प्रक्रि या शुरू होती है। महिलाओं ने बताया कि बरसात के समय सबसे ज्यादा दिक्कत होती थी क्योंकि कचरा बहुत समय का भी आता है और तो कई बार कचरे में कई एेसे चीजे भी आ जाती है कि बहुत परेशानी होती है पर हम इस बात से खुश है की हम अपने शहर को साफ करने का काम भी कर रहे है साथ में कचरे का उपयोग भी कर रहे है। जब खाद लगातार बिकना शुरू हो जाएगा और उसके पैसे खाते में आने लगेंगे।

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कचरा संग्रहण के लिए मिले है एल्यूमिनियम के टब
समिति को सूखा कचरा संग्रहित करने कि लिए एल्यूमिनियम के टब दिए गए है। इनमें कांच-प्लास्टिक की बोतल, प्लास्टिक व एल्यूमिनियम के ढक्कन, लोहें के टुकड़े आदि की छटाई कर रख रही है। इन्ह सभी समान को यह स्थानीय कबाड़ी को बेचने का काम कर रही है। उनका कहना है कि यह टब समान रखने के लिए बहुत काम आ रहे है।

खाद की बढ़ाई जाएगी कीमत
समिति की महिलाओं ने बताया कि अब तक एक बार ही 14 रूपए किलो दर से खाद बेचा गया है। पर महिलाओं का कहना है कि अब खाद लगभग 20 रूपए दर से बेचा जाएगा। उनको कहना है कि न केवल खाद बनाने में मेहनत लगती है साथ ही बहुत समय भी लगता है। इसलिए खाद की कीमत बढ़ाई जाएगी।

प्लास्टिक का भी हो रहा उपयोग
समिति की महिलाओं ने बताया कि कचरे का आधे से ज्यादा सामान का उपयोग हो जाता है। कुछ खाद बनाने में इसके साथ ही कागज, प्लास्टिक, बोतल आदि सभी किलो हिसाब से बिक जाते है। लोग खराब समझ कर फेंक देते है उसका भी मोल होता है। एेसे करने से न केवल शहर साफ हो रहा है बल्कि बेकार समझी जाने वाली वस्तु का भी उपयोग हो रहा है।

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Updated on:
21 Jan 2018 12:12 pm
Published on:
21 Jan 2018 11:54 am
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