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Tribal Culture: बस्तर में 27 परिवार आदिवासी संस्कृति में वापस लौटे, 15 वर्षों से दूसरे धर्म का कर रहे थे पालन, गांव में जश्न का माहौल

Bastar News: गांव में 27 परिवारों ने 15 वर्ष बाद पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ आदिवासी आस्था में वापसी की। पूरे गांव में खुशी और जश्न का माहौल रहा।
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बस्तर

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Jul 06, 2026

Tribal Culture

27 परिवार आदिवासी संस्कृति में वापस लौटे (Photo Patrika)

Bastar Tribal News: बस्तर जिले के दरभा विकासखंड अंतर्गत ग्राम चिड़पाल में 27 आदिवासी परिवारों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अपनी मूल आदिवासी आस्था में वापसी की। जिसमें गांव के मावली माता के पुजारी, गायता, नाईक-पाई सहित ग्रामीणों की मौजूदगी में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई गई। यह सभी परिवार पिछले करीब 15 साल से मतांतरित परिवार के रूप में रह रहे थे।

27 सदस्यों ने लिया निर्णय

जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से गांव में धार्मिक आस्था, सामाजिक परंपराओं व आपसी भाईचारे को लेकर लगातार शांति वार्ता चल रही थी। इसी प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब गांव के 27 सदस्यों ने स्वेच्छा से आदिवासी परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर अपनी मूल आस्था में लौटने का निर्णय लिया।

सभी परिवारों की पारंपरिक तरीके से मूल धर्म में वापसी

बताया गया कि ये परिवार पिछले लगभग डेढ़ दशक से अन्य धर्म का पालन कर रहे थे। धार्मिक अनुष्ठान के बाद सर्व मूल निवासी समाज ने सभी परिवारों का पारंपरिक तरीके से स्वागत करते हुए उन्हें पुन: गांव के सामाजिक जीवन में शामिल किया। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों ने सार्वजनिक रूप से आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन करने का संकल्प भी लिया।

परिवारों की वापसी से गांव में जश्न जैसा माहौल

सर्व मूल निवासी समाज के कार्यकर्ता गंगाराम मरकाम ने बताया कि मूल आस्था में वापसी से पूरे गांव में खुशी और जश्न जैसा माहौल है। उन्होंने कहा कि समाज का उद्देश्य सामाजिक एकता, भाईचारे और पारंपरिक मूल्यों को मजबूत करना है। इस अवसर पर समाज के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने भी सामाजिक सौहार्द बनाए रखते हुए गांव के विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प दोहराया।

सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रयास

सर्व मूल निवासी समाज के कार्यकर्ता गंगाराम मरकाम ने कहा कि मूल आस्था में लौटने वाले परिवारों का समाज ने खुले मन से स्वागत किया है। उनका कहना है कि समाज का उद्देश्य सामाजिक एकता, भाईचारे और आदिवासी परंपराओं को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर सभी ग्रामीणों ने गांव के विकास, सामाजिक सौहार्द और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प भी दोहराया। गांव के वरिष्ठ लोगों का मानना है कि इस तरह के आयोजन से पारंपरिक आदिवासी संस्कृति और सामाजिक एकजुटता को मजबूती मिलती है। वहीं, पूरे कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में ग्रामीण इसकी सहभागिता के साक्षी बने।