
बस्ती. विदेश में जाकर कमाने की ललक एक शख्स की जान पर आफत बन गई। बस्ती सदर तहसील के रामपुर गांव के रहने वाले 27 साल के शहबाज अहमद अपने ही भांजे मो0 आसिफ के सहयोग से ओमान देश में बतौर ड्राइवर की नौकरी करने के लिए गया। मगर कुछ दिन बीत जाने के बाद से ही कंपनी शहबाज अहमद का शोषण करने लगी। अपने परिवार को वाट्एसप के जरिये एक विडियो संदेश भेजकर शहबाज ने अपनी व्यथा इंडिया तक पहुंचाई है।
दरअसल, 16 नवबंर 2014 में शहबाज अहमद ओमान की बिन घोडियर अल शमिल्ला ट्रेड एंड कान्ट्रैक्टर कंपनी में नौकरी के लिये अप्लाई किया। जिसमें उनका सलेक्शन 200 रियाल प्रति महिने की सैलरी पर हो गया। मगर दो साल बाद अगस्त 2016 से अब तक कंपनी ने सैलरी नहीं दिया है। आरोप है कि, जब चह सैलरी मागंने जाता है तो कंपनी के लोग उसे भला बुरा कह कर बदसलुकी पर आमादा हो जाते हैं। कंपनी ने शहबाज अहमद और उसके दो और साथियों को बंधक बनाकर रखा है और उससे काम भी लिया जा रहा है।
कंपनी की तरफ से अभी इस मामले में कोई सफाई नहीं आई है, मगर पीड़ित शहबाज के परिवार वालों ने विदेष मंत्री सुषमा स्वराज से न्याय की गुहार लगाई है। ओमान में गरीब मुस्लिम लड़कों को बहला फुसलाकर एजेंट कपनिंयो में नौकरी करने के लिये भेज देते हैं, लेकिन वहां पहुंच जाने के बाद उन लड़कों के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। कपंनी के लोग उनसे कुछ भी काम करवायें उन्हे करना पड़ता है। ऐसे ही एक कंपनी के झांसे में आकर शहबाज अहमद अपने परिवार का सहारा बनकर ओमान गया और वहां कंपनी के जाल में वे पुरी तरह से फंस गया। शहबाज अहमद का परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है। उनके भाई याकूब अहमद कैंसर से पिड़ित है, जिसने अपने भाई के साथ किए जा रहे जुल्म से निजात दिलाने की मांग भारत सरकार से की है।
याकूब सपा के नेता भी है इसलिये वह अपने पार्टी के स्तर से भी भाई की मदद के लिये गुहार लगा चुके हैं। लगातार शहबाज अहमद अपने परिवार के लोगों से बात कर के अपनी परेशानी बता रहा है। बहरहाल पूरे मामले को लेकर भारत सरकार कितना संजीदगी से कार्रवाई करता है, जिससे एक परेशान परिवार को उसका बेटा वापस मिल जाये। यह आने वाला वक्त बताएगा।
input- सतीश सिंह