
बस्ती. यूपी में सत्ता किसी की भी हो। पुलिस की कार्यप्रणाली बदलने वाली नहीं है। विभागीय अधिकारी भी पुलिस की गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके चलते पुलिस पर विभागीय खौफ तक नहीं होता है। बस्ती में एफआईआर दर्ज कराने के नाम पर मुंशी द्वारा रिश्चत लेते एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अब देखना है कि पुलिस के आला अधिकारी जांच का आश्वसन देकर किस तरह से कार्रवाई करते हैं।
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बस्ती के हरैया थाने में लाइसेंसी असलहे के गायब हो जाने पर एफआईआर लिखवाने के लिए मुंशी ने दो हजार रिश्वत की मांग की। स्थानीय थाना क्षेत्र के जगदीशपुर निवासी चन्द्र प्रकाश सिंह ने बिना रिश्वत के मुकदमा दर्ज करने को कहा, लेकिन मुंशी तैयार नहीं हुआ। मुंशी ने चन्द्र प्रकाश से गुमशुदगी की तहरीर देते हुए साफ कहा कि मुकदमा नहीं दर्ज होगा।इसके बाद १५०० रुपये देने पर मुकदमा दर्ज करने का सौदा तय हो गया। इसके बाद चन्द्र प्रकाश ने मुंशी को दो हजार का नोट दिया और मुंशी ने तय सौदे के अनुसार ५०० रुपये वापस भी किया। यह सारी प्रक्रिया वीडियो में कैद हो गयी। इसके बाद सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया। मीडिया ने जब वायरल वीडियो के संदर्भ में एसपी संकल्प शर्मा से पूछा तो उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है और सीओ हरैया को मामले की जांच सौंपी गयी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी।
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पहले भी पुलिसकर्मियों द्वारा रिश्वत लेते हुए वीडियो हुआ था वायरल
बस्ती के दुबौलिया थाना के मुंशी का रिश्वत लेते वीडियो वायरल हुआ था और इसको लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप भी मचा था इसके बाद भी पुलिस की कार्यप्रणाली में बदलाव नहीं हो रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ एक तरफ भ्रष्ट अधिकारियों को वीआरएस देने की मुहिम चलाये हुए हैं तो उनके ही गढ़ के बगल वाले जिले में पुलिस खुलेआम रिश्वत लेकर अपनी ड्यूटी निभा रही है।
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नीचे से उतर तक बहती है भ्रष्टाचार की धारा
पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की धारा नीचे से उपर की और बहती है। किसी थाने को माह में जितनी कमाई होती है उसमे उपर से लेकर नीचे सभी लोगों का हिस्सा तय होता है। पुलिस विभाग में यह बात भी काफी सुर्खियों में रहती है कि आमदनी के हिसाब से थाने में तैनाती कराने के लिए पैसा लगता है।
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