विशेषज्ञों के अनुसार इन टैटूज का त्वचा पर दुष्प्रभाव फौरन या 1-2 हफ्ते में दिखने लगता है। कई बार इन टैटूज का असर बाद में भी दिखाई देता है।
भले ही दर्द और परमानेंट डिजाइन से बचने के लिए लोग टेंपरेरी टैटू का सहारा लेते हों लेकिन इससे त्वचा पर एलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं। इसी तरह डाई बेस्ड हिना भी त्वचा के लिए नुकसानदायी हो सकती है। इन टैटूज में इस्तेमाल होने वाले डाई और सिंथेटिक रंगों से स्किन पर रैशेज, फफोले, धब्बे, त्वचा के रंग में बदलाव व धूप में जाने पर सेंसटिविटी बढ़ सकती है। ये सिंथेटिक रंगों त्वचा को कई तरह से नुकसान पहुंचाते हैं।
दुष्प्रभाव : विशेषज्ञों के अनुसार इन टैटूज का त्वचा पर दुष्प्रभाव फौरन या 1-2 हफ्ते में दिखने लगता है। कई बार इन टैटूज का असर बाद में भी दिखाई देता है।
डॉक्टरी राय -
टेंपरेरी टैटू को बनाने के लिए नीला, लाल और हरा रंग ज्यादा प्रयोग किया जाता है। कई बार हरा व लाल रंग बिना सर्जरी के साफ नहीं होता और सर्जरी के बाद भी सफेद निशान रहता है। टैटू बनवाने से हैपटाइटिस बी और एड्स जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं इसलिए टैटू बनवाने हो सकें तो बचें।