
ब्यावर (अजमेर).
राह चलते इन दिनों आपको सावधान रहने की जरूरत है। गर्मी के चलते श्वान गुस्सैल हो गए हैं और इनका गुस्सा कभी भी आपको अस्पताल जाने को मजबूर कर सकता है। गर्मी में गुस्साए श्वानों के काटने से बढ़े मरीज अमृतकौर चिकित्सालय में भी देखे जा सकते हैं। मार्च माह में जहां प्रतिदिन औसत दो से तीन श्वान काटने के पीडि़त आ रहे थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर पांच से सात हो गई है।
जिस दिन तपन तेज होती है। उस दिन श्वान काटने के पीडि़तों की संख्या भी बढ़ जाती है। अमृतकौर चिकित्सालय में चार जिलों के मरीज आते हैं। यहां पर मरीजों का खासा दबाव रहता है। पाली जिले के रायपुर, जैतारण, नागौर जिले के रियांबड़ी, राजसमंद जिले के भीम-देवगढ़, भीलवाड़ा जिले के आसींद व बदनौर क्षेत्र के ब्यावर से सटे क्षेत्रों के मरीज यहां पर आते हैं। इन क्षेत्रों में अधिकांश लोग मवेशी पालन व कृषि का काम करते हैं।
ऐसे में लोगों का अधिकांश समय घरों से बाहर ही बीतता है। ऐसे में इन क्षेत्रों में श्वान काटने के पीडि़त भी अधिक सामने आते हैं। हालात यह हैं कि जनवरी में जहां श्वान काटने के पीडि़तों की संख्या 74 थी। यह संख्या मार्च में 115 एवं मई माह में 130 के पार पहुंच गई। चिकित्सकों की माने तो गर्मी में श्वान को पानी नहीं मिल पाने के कारण व गुस्सैल हो जाते हैं।
गर्मी में बढ़ता है आंकड़ा चिकित्सकों का कहना है कि श्वानों को गुस्सा गर्मी बढऩे से आता है। जिस दिन तापमान 40 के आस-पास रहता है। इस दिन श्वान काटने के मामले अधिक रहते हैं। इस माह भी जिस दिन तापमान 40 के पार रहा। उस दिन पांच से अधिक श्वान काटने के पीडि़त अस्पताल पहुंचे।
श्वान काटने के पीडि़त माह आए पीडि़त
जनवरी 74
फरवरी 89
मार्च 115
अप्रेल 118
मई 132