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ब्यावर: ट्रॉली नहीं मिली तो पलंग सहित प्रसूता को एम्बूलेंस तक लाए, अस्पताल प्रशासन पर भड़के परिजन

Government Hospital Mismanagement: ब्यावर के राजकीय अमृतकौर जिला चिकित्सालय में ऑपरेशन के बाद एक प्रसूता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। चिकित्सक ने हालत बिगड़ने पर प्रसूता को अजमेर के लिए रेफर कर दिया। इस दौरान प्रसूता को वार्ड से एम्बूलेंस तक ले जाने के लिए उसके परिजन ट्रॉली का इंतजार करते रहे।

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प्रसूता को पलंग समेत वार्ड से बाहर लाते परिजन, पत्रिका फोटो

Government Hospital Mismanagement: ब्यावर के राजकीय अमृतकौर जिला चिकित्सालय में ऑपरेशन के बाद एक प्रसूता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। चिकित्सक ने हालत बिगड़ने पर प्रसूता को अजमेर के लिए रेफर कर दिया। इस दौरान प्रसूता को वार्ड से एम्बूलेंस तक ले जाने के लिए उसके परिजन ट्रॉली का इंतजार करते रहे। लम्बे इंतजार के बाद ट्रॉली नहीं मिली तो परेशान परिजन प्रसूता को पलंग सहित मदर चाइल्ड विंग के मुख्य दरवाजे तक लाए। जहां उसे एम्बूलेंस में लेकर अजमेर के लिए रवाना हुए। इस दौरान परिजनों ने अस्पताल की अव्यवस्था पर आक्रोश जताया।

यह है पूरा मामला

मिली जानकारी के अनुसार मसूदा रोड निवासी अंजलि के प्रसव पीड़ा होने पर राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय ब्यावर में भर्ती कराया गया था। मंगलवार दोपहर में ऑपरेशन के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। ड्यूटी चिकित्सक ने वार्ड में पहुंच कर प्रसूता की गंभीर हालत को देखते हुए अजमेर रेफर कर दिया।

नहीं मिली ट्रॉली

परिजनों का कहना था कि इस दौरान करीब आधा घंटा तक ट्रॉली का इंतजार किया। प्रसूता की लगातार बिगड़ रही हालत के चलते वार्ड में ट्रॉली नहीं पहुंचने से परेशान परिजन उसे पलंग सहित उठाकर मुख्यद्वार पर ले आए। यहां से एम्बूलेंस में लेकर अजमेर के लिए रवाना हो गए। वार्ड में मौजूद डॉक्टर को भी ट्रॉली का इंतजाम नहीं होने के बारे में जानकारी दी लेकिन डॉक्टर दिखवाते हैं कहकर रवाना हो गए।

अनदेखी का लगाया आरोप

घटना के बाद अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताकर नारेबाजी की। परिजनों का कहना था कि प्रसूता की तबीयत खराब होने पर स्टाफ को बताने के बावजूद अनदेखी की गई। ऐसे में तबीयत खराब होती गई। कई बार चिकित्सकों को प्रसूता की गंभीर हालत को लेकर अवगत कराने के बावजूद कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए।

इनका कहना है…

सिजेरियन के बाद जच्चा-बच्चा ठीक थे। बाद में तबीयत खराब होने पर डयूटी चिकित्सक ने रेफर कर दिया। ट्रॉली नहीं पहुंचने के मामले की जानकारी नहीं है। प्रतिदिन 20-25 प्रसव होते है। अकेले सारा काम संभाल रहे हैं।
-डॉ. आशा देवड़ा,स्त्री रोग विशेषज्ञ, राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय-ब्यावर

सरकारी अस्पतालों में नहीं सुधरे हालात

कोटा जिला अस्पताल में बीते दिनों प्रसूताओं की मौत के मामले में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने अस्पतालों में व्यवस्थाएं सुधारने के दावे किए थे। बावजूद इसके अब तक भी प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में हालात जस के तस बने हुए हैं।