बेमेतरा

बेमेतरा की बेटी का कमाल, 10 हजार में बनाया अनोखा उपकरण, स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान में बनेगा मददगार

Chhattisgarh news: बेमेतरा की 11वीं की छात्रा कोमिका यादव ने 10 हजार रुपए में स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान में मददगार उपकरण का प्रोटोटाइप बनाया। राष्ट्रीय इंस्पायर अवॉर्ड में केंद्रीय राज्यमंत्री ने किया सम्मानित।
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Oct 17, 2026
Chhattisgarh news
11वीं की छात्रा कोमिका यादव और व्याख्याता पुष्पा नायक (Photo Patrika)

Chhattisgarh News: बेरला विकासखंड के ग्राम कंडरका की 11वीं कक्षा की छात्रा कोमिका यादव ने अपनों को स्तन कैंसर से खोने के दर्द को वैज्ञानिक नवाचार की प्रेरणा बना लिया। परिवार में इस बीमारी के कारण हुई असमय मौतों ने कोमिका को झकझोर दिया। उन्होंने स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद करने वाला उपकरण बनाने का संकल्प लिया। जीव विज्ञान की व्याख्याता पुष्पा नायक के मार्गदर्शन में महज 10 हजार रुपए की लागत से 'वियरेबल कैंसर डिटेक्टर ब्रा' का प्रोटोटाइप तैयार किया। इस नवाचार ने कोमिका को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

पिता राजमिस्त्री हैं और मां गृहिणी

कोमिका के पिता राजमिस्त्री हैं और मां गृहिणी। परिवार की सीमित आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया। ईएसपी-32 माइक्रोकंट्रोलर और सामान्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से तैयार प्रोटोटाइप का उद्देश्य स्तन कैंसर के संभावित शुरुआती संकेतों की पहचान में सहायता करना है। भूमिका बताती है कि यहां तक पहुंचने में उनकी शिक्षिका पुष्पा नायक की महत्वपूर्ण भूमिका है उनके मार्गदर्शन से वह यहां तक पहुंच पाई है. हालांकि, इसकी चिकित्सकीय उपयोगिता और सटीकता की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक हैं।

790 प्रतिभागियों के बीच बनाई पहचान

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय इंस्पायर अवॉर्ड मानक प्रतियोगिता में कोमिका ने अपना नवाचार प्रदर्शित किया। देशभर के 790 प्रतिभागियों के बीच उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई। समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उन्हें सम्मानित किया। कोमिका को जापान जाने का अवसर मिलने की भी जानकारी दी गई है। ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बीच उनकी उपलब्धि विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढऩे का सपना देखने वाली बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

\अपनों को खोने का दर्द बना नवाचार की प्रेरणा

कोमिका ने परिवार में स्तन कैंसर के कारण हुई असमय मौतों को करीब से देखा है। इस अनुभव ने उन्हें झकझोर दिया और उनके मन में इस बीमारी की शुरुआती पहचान में मदद करने वाला उपकरण बनाने का विचार आया। उन्होंने इस दिशा में काम शुरू किया और अपनी सोच को प्रोटोटाइप का रूप दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद कोमिका ने हार नहीं मानी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से अपने नवाचार को तैयार किया। कोमिका के पिता राजमिस्त्री हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। सामान्य आर्थिक परिस्थितियों वाले परिवार से आने वाली कोमिका ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित किया कि बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए संसाधनों से ज्यादा जरूरी जज्बा और सही मार्गदर्शन है।

Updated on:
17 Oct 2026 11:36 am
Published on:
17 Oct 2026 11:36 am