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छत्तीसगढ़ में जादू-टोने के शक में 60 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या, सिर और चेहरे पर मिले गंभीर चोटों के निशान

Witchcraft Suspicion Murder: छत्तीसगढ़ में जादू-टोने के शक में हत्या का एक और मामला सामने आया है। बेमेतरा के भटगांव में 60 वर्षीय बुजुर्ग की टंगिया से हमला कर हत्या कर दी गई।
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Murder

हत्या, फोटो सोर्स- पत्रिका

Chhattisgarh Crime News: छत्तीसगढ़ में जादू-टोने और अंधविश्वास के शक में हत्या की एक और घटना सामने आई है। नवरात्र से ठीक पहले आरंग क्षेत्र में जादू-टोने के संदेह में दोहरे हत्याकांड की घटना के बाद अब बेमेतरा जिले के भटगांव में 60 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या का मामला सामने आया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग पर टंगिया से हमला किया गया, जिससे उनके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई। घटना ने एक बार फिर अंधविश्वास के नाम पर होने वाली हिंसा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

श्मशान घाट के पास नहर किनारे हुई वारदात पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, घटना 13 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 6:30 बजे से 14 अक्टूबर की सुबह 3 बजे के बीच हुई। वारदात बेमेतरा जिले के परपोडी चौकी क्षेत्र के ग्राम भटगांव में श्मशान घाट के पास नहर किनारे स्थित भाठा में अंजाम दी गई।

मृतक की पहचान 60 वर्षीय बलराम पटेल, पिता माधो पटेल, निवासी बंजारपुर के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, जादू-टोने के संदेह में उन पर धारदार हथियार टंगिया से हमला किया गया। हमले में सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

सूचना पर दर्ज हुई प्राथमिकी, जांच में जुटी पुलिस

मामले में प्रार्थी चन्दु उर्फ चन्द्रप्रकाश पटेल, पिता सुकालु पटेल, उम्र 20 वर्ष, निवासी बंजारपुर की सूचना पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर मामले की जांच कर रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

कानून के बावजूद क्यों नहीं थम रहा अंधविश्वास?

विज्ञान और तकनीक के इस दौर में भी जादू-टोने के संदेह में हिंसा और हत्या की घटनाएं समाज के सामने गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। छत्तीसगढ़ में टोनही प्रताड़ना के खिलाफ कानून होने के बावजूद अंधविश्वास के नाम पर लोगों को प्रताड़ित किए जाने के मामले सामने आते रहते हैं।

आरंग की घटना के बाद बेमेतरा में सामने आया यह मामला भी कई सवाल खड़े करता है। आखिर कब तक अंधविश्वास के शक में लोगों की जान जाती रहेगी? समाज में जागरूकता बढ़ाने और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कानून के साथ-साथ वैज्ञानिक सोच और सामाजिक चेतना को मजबूत करना भी जरूरी है।