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DMF खरीदी में गड़बड़ी! बेमेतरा के छह स्कूलों से किड्स चेयर गायब, एक विद्यालय को नहीं मिला फर्नीचर सेट

DMF Procurement: बेमेतरा जिले में DMF से स्कूलों के लिए खरीदे गए फर्नीचर पर सवाल उठे हैं। छह स्कूलों में किड्स चेयर नहीं मिलीं, जबकि एक विद्यालय को फर्नीचर सेट नहीं मिला। सत्यापन रिपोर्ट भी नदारद है।
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DMF Procurement

DMF खरीदी में गड़बड़ी छह स्कूलों से किड्स चेयर गायब (Photo Patrika)

DMF Procurement: जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए की गई फर्नीचर खरीदी और वितरण पर गंभीर सवाल उठे हैं। पत्रिका की पड़ताल में 14 स्कूलों में से छह के संस्था प्रमुखों ने किड्स चेयर नहीं मिलने की पुष्टि की है। वहीं, परपोड़ी के तत्कालीन और वर्तमान प्राचार्य ने फर्नीचर सेट की आपूर्ति से इनकार किया है। दूसरी ओर, सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी में भौतिक सत्यापन रिपोर्ट नहीं होने से वितरण प्रक्रिया की पारदर्शिता भी सवालों के घेरे में है।

कई बार शिकायत सामने आई

जिले के 18 स्वामी आत्मानंद स्कूलों के लिए किड्स चेयर, स्टूडेंट डेस्क, ऑफिस टेबल, ऑफिस चेयर, अलमारी और बुक शेल्फ सहित छह प्रकार की सामग्री खरीदी गई थी। दस्तावेजों में आपूर्ति दर्ज होने के बावजूद धरातल पर सामग्री नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। देवरबीजा, बेरला, कुसमी, ठेलका, सिंघौरी और राजामोहगांव के स्कूलों में किड्स चेयर नहीं पहुंचने की जानकारी मिली है।

एक कुर्सी की कीमत 5200 रुपए

रिकॉर्ड के अनुसार, प्रत्येक स्कूल के लिए 10 किड्स चेयर की आपूर्ति दर्शाई गई है। एक कुर्सी की कीमत 5200 रुपए निर्धारित की गई है। इस हिसाब से प्रत्येक स्कूल के लिए किड्स चेयर पर 52 हजार रुपए खर्च किए गए। इसके अलावा, एक स्कूल के लिए छह प्रकार की सामग्री वाले फर्नीचर सेट की कीमत करीब 3.90 लाख रुपए बताई गई है। परपोड़ी के प्राचार्यों के अनुसार, उन्हें संबंधित अवधि में यह सामग्री नहीं मिली।

18 स्कूलों में आपूर्ति का दावा

फर्नीचर वितरण सूची में राठी स्थित आत्मानंद स्कूल, सिरवाबांधा रोड, सिंघौरी, आत्मानंद कन्या शाला बेमेतरा, देवरबीजा, देवकर, ठेलका, थानखम्हरिया, कुसमी, बेरला, परपोड़ी, राजामोहगांव, नांदघाट, मारो, दाढ़ी, हसदा, साजा और नवागढ़ के स्कूल शामिल हैं। इन संस्थानों में दर्ज आपूर्ति का वास्तविक वितरण रिकॉर्ड से मिलान कराने पर ही स्पष्ट होगा कि कितनी सामग्री खरीदी गई, कितनी पहुंची और कितनी का सत्यापन हुआ।

सत्यापन रिपोर्ट के बिना वितरण पर सवाल

शिक्षा विभाग ने आरटीआई के तहत उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में फर्नीचर की अधिकृत भौतिक सत्यापन रिपोर्ट नहीं दी है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि आपूर्ति के बाद सामग्री का सत्यापन किस स्तर पर और किस आधार पर किया गया। गुणवत्ता जांच, वितरण रिकॉर्ड और उपयोगिता प्रमाण पत्र की स्थिति भी स्पष्ट होना बाकी है। ऐसे में दस्तावेजों में दर्ज आपूर्ति और स्कूलों में उपलब्ध सामग्री का मिलान कराना जरूरी है।

61.93 लाख की खरीदी, बाजार दर से तुलना पर सवाल

डीएमएफ से फर्नीचर खरीदी पर कुल 61.93 लाख रुपए खर्च किए जाने का उल्लेख है। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर खरीदी दरों की तुलना बाजार मूल्य से करने पर बड़ा अंतर होने का दावा किया गया है। आरोप है कि किड्स चेयर और टेबल-कुर्सी सेट की दरें सामान्य बाजार मूल्य से करीब तीन गुना अधिक हैं। बाजार दर के हिसाब से कुल खर्च में 35 लाख रुपए से अधिक का अंतर सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, इस अंतर की पुष्टि के लिए सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी विनिर्देश, कर, परिवहन और अन्य लागतों सहित तुलनात्मक दरों का स्वतंत्र परीक्षण जरूरी है। सरकारी खरीद के लिए जेम पोर्टल का इस्तेमाल अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन अधिक कीमत पर खरीदी और आपूर्ति में कमी की शिकायतों की जांच आवश्यक है।

डीईओ ने मांगे दस्तावेज

खरीदी से संबंधित जानकारी शाखा प्रभारी से मांगी गई है। इसमें भौतिक सत्यापन रिपोर्ट, उपयोगिता प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। उनके अनुसार, रिकॉर्ड मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • अभय जायसवाल,जिला शिक्षा अधिकारी