
Bemetara Collector Land Case: जमीन के त्रुटि सुधार और नामांतरण के लिए बीते 5-6 महीनों से तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे ग्रामीणों को राहत मिलने की बजाय नायब तहसीलदार की ओर से क्षमा-याचना का नोटिस थमा दिया गया। नोटिस में आवेदकों को 7 दिनों के भीतर लिखित में क्षमा-याचना करने के लिए कहा गया है। अपनी समस्या और पीड़ा अधिकारियों के सामने रखने वाले आवेदकों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
परेशान ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और मीडिया के समक्ष अपनी गुहार लगाई। इसके बाद ग्राम मऊ के ग्रामीण सोमवार को बेमेतरा कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई। इस दौरान तीसरी आवेदक पुष्पा देवी भी अपनी शिकायत लेकर पहुंचीं। वह अपने बेटे के निधन की जानकारी देते हुए भावुक हो गईं और बेमेतरा आने में अपनी असमर्थता जताई।
तहसील कार्यालय के ढुलमुल रवैये से परेशान होकर ग्राम मऊ के ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे। पति की मौत के बाद करीब 6 महीने से भूमि नामांतरण के लिए परेशान चमेली बाई और करीब 5 महीने से प्रमाणीकरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे मिथलेश साहू ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी परेशानी बताई।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम और भू-राजस्व संहिता के तहत राजस्व प्रकरणों के निराकरण की समय सीमा तय है। निर्विवाद नामांतरण का कार्य अधिकतम 30 दिनों में और विवादित मामलों का निराकरण 90 दिनों के भीतर किया जाना है। इसी तरह जमीन के दस्तावेजों और रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार से जुड़े प्रकरणों का निराकरण भी निर्धारित समय सीमा में किया जाना चाहिए।
तहसील कार्यालय की इस पूरी व्यवस्था के बीच आवेदकों का राहत मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। बार-बार अधिकारियों की गैरहाजिरी और प्रकरणों के लंबित रहने की शिकायतों के बीच समस्या का समाधान होने के बजाय पीड़ितों को ही नोटिस भेज दिया गया। इस नोटिस में आवेदकों से लिखित में क्षमा-याचना करने को कहा गया है। इसे लेकर अब प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
प्रतिष्ठा ममगाई, कलेक्टर, बेमेतरा के मुताबिक, “आवेदक अपनी शिकायत लेकर उपस्थित हुए थे। पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
उमेश लहरी, नायब तहसीलदार, बेमेतरा के मुताबिक, “इस संबंध में अभी कुछ नहीं बोलूंगा। अपने उच्च अधिकारी से मार्गदर्शन लेने के बाद ही अपना पक्ष रखूंगा।”