
75% दिव्यांगता भी नहीं रोक सकी हौसला (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Chhattisgarh Teacher News: शासकीय प्राथमिक शाला अकोला की प्रधान पाठिका हिमकल्याणी सिन्हा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय कार्य कर रही हैं। उनकी राह संघर्षों से भरी रही है। 75 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांगता से जूझने के बावजूद उन्होंने अपनी शारीरिक कमजोरी को कभी भी बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य के बीच बाधा नहीं बनने दिया। वे शत-प्रतिशत निष्ठा के साथ बच्चों के अध्यापन और मार्गदर्शन में जुटी रहती हैं।
अपने शैक्षणिक करियर के 17 वर्ष सैगोना विद्यालय में सहायक शिक्षिका के रूप में समर्पित किए और वर्ष 2024 से वे शासकीय प्राथमिक शाला अकोला में प्रधान पाठिका के पद पर पूरी निष्ठा से कार्यरत हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके इसी अप्रतिम समर्पण और नवाचारों के लिए उन्हें वर्ष 2024 में राज्यपाल के हाथों प्रतिष्ठित राज्यपाल पुरस्कार से भी अलंकृत किया जा चुका है।
उन्होंने सैगोना और अकोला दोनों विद्यालयों में बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने के उद्देश्य से अपनी निजी कमाई से अब तक एक लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च की है। इस राशि से उन्होंने बच्चों के सीखने के लिए खिलौना कॉर्नर बनवाया, कक्षाओं में आकर्षक टाइल्स लगवाए और दोनों स्कूलों को अत्याधुनिक स्मार्ट टीवी भेंट किए ताकि ग्रामीण बच्चे भी डिजिटल शिक्षा से जुड़ सकें। हाल ही में अकोला स्कूल में छात्र-छात्राओं की स्वच्छता और सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्वयं के 40 हजार रुपए व्यय कर एक सर्वसुविधायुक्त प्रसाधन कक्ष का निर्माण कराया है।
हिमकल्याणी सिन्हा की इस सेवा भावना और आत्मीयता के कारण सैगोना और अकोला, दोनों ही गांवों के ग्रामीण उनके कार्यों की सराहना करते नहीं थकते। वे शासन की समस्त शैक्षणिक योजनाओं को जमीनी स्तर पर बेहद ईमानदारी और तत्परता के साथ संचालित कर रही हैं। शिक्षक दिवस पर मिला यह सम्मान अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है। हिमकल्याणी ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों तो कोई भी शारीरिक बाधा राष्ट्र निर्माण के रास्ते में नहीं आ सकती। उनका जीवन और शिक्षण के प्रति यह अतुलनीय समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।
Updated on:
4 Sep 2026, 1:06 PM IST
Published on:
4 Sep 2026, 1:06 PM IST
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