बेतुल

इंदौर हादसे के बाद भी बेपरवाह व्यवस्था, बैतूल में पेयजल सप्लाई पर मंडरा रहा खतरा

-वाल्व गंदे पानी में डूबे, सफाई के दावों पर सवाल, निगरानी व्यवस्था कागजों तक सीमित। बैतूल। इंदौर में दूषित पेयजल की सप्लाई से लोगों की मौतों का मामला सामने आने के बाद भी बैतूल में पेयजल व्यवस्था की हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। नगर पालिका भले ही सतर्कता के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी […]

2 min read

-वाल्व गंदे पानी में डूबे, सफाई के दावों पर सवाल, निगरानी व्यवस्था कागजों तक सीमित।

बैतूल। इंदौर में दूषित पेयजल की सप्लाई से लोगों की मौतों का मामला सामने आने के बाद भी बैतूल में पेयजल व्यवस्था की हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। नगर पालिका भले ही सतर्कता के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हालात इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। शहर में करीब 190 किलोमीटर लंबा पेयजल सप्लाई नेटवर्क फैला हुआ है, जिसमें मेन पाइप लाइनों के साथ-साथ डिस्टीब्यूशन लाइनों का जाल बिछा है। अधिकांश मेन लाइनें भूमिगत हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर ये जमीन के ऊपर भी बिछी हुई हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।
कॉलेज चौक के पास मेन पाइप लाइन ऐसी जगह से गुजर रही है, जहां सीवरेज का गंदा पानी ठीक वाल्व के समीप बहता है। यदि किसी कारणवश वाल्व में लीकेज हुआ, तो दूषित पानी सीधे पेयजल लाइन में प्रवेश कर सकता है। यही स्थिति अन्य इलाकों में भी देखने को मिल रही है, जहां प्रेशर वाल्व के आसपास कचरा, कीचड़ और रुका हुआ गंदा पानी जमा है। यह न केवल तकनीकी लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि आम नागरिकों की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ भी है। नगर में पेयजल सप्लाई के लिए 10 ओवरहेड टंकियां बनाई गई हैं। नगर पालिका का दावा है कि इन टंकियों की साल में दो बार सफाई कराई जाती है, लेकिन कहीं भी सफाई की तारीख या समय का उल्लेख नहीं है। न तो टंकियों पर सूचना बोर्ड लगे हैं और न ही कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वाकई नियमित सफाई हो रही है या फिर यह सिर्फ कागजी दावा बनकर रह गया है। इंदौर की घटना के बाद जलशाखा टीम द्वारा वार्डों में भ्रमण कर जांच किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन सामने आई तस्वीरों में कई वाल्व गंदे पानी में डूबे नजर आ रहे हैं। आसपास फैली गंदगी और कीचड़ इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सफाई और निगरानी व्यवस्था लंबे समय से उपेक्षित है। जलशाखा प्रभारी द्वारा अमृत योजना के तहत नई लाइनों के सुरक्षित होने की बात कही जा रही है, लेकिन जब वाल्व और आसपास की सफाई ही नहीं होगी तो नई लाइनें भी कितनी सुरक्षित रहेंगी, यह बड़ा सवाल है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पेयजल वाल्वों की नियमित सफाई और निगरानी अनिवार्य की जानी चाहिए। इंदौर जैसी घटना से सबक लेने के बजाए यदि सिर्फ जांच और निर्देशों तक ही व्यवस्था सीमित रही, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

Updated on:
03 Jan 2026 08:21 pm
Published on:
03 Jan 2026 08:20 pm
Also Read
View All

अगली खबर