
Betul news: घर की पहचान अब सिर्फ पिता या परिवार के पुरुष सदस्य के नाम से ही हो, यह सोच धीरे-धीरे बदल रही है। बेटियों के नाम से घर की पहचान बनाने का अभियान लोगों की सोच में बदलाव ला रहा है। लाडो फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब तक करीब 4 हजार घरों पर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाई जा चुकी हैं। लाडो फाउंडेशन के डायरेक्टर अनिल यादव ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी के जन्मदिन 8 नवंबर 2015 पर इस अभियान की शुरुआत की थी। उद्देश्य था कि बेटी को परिवार में सम्मान और बराबरी की पहचान मिले।
धीरे-धीरे अभियान ने लोगों का ध्यान खींचा और अब यह 28 राज्यों के 27 जिलों के करीब 130 गांवों तक पहुंच चुका है। अमेरिका, लंदन और दुबई में भी अभियान के माध्यम से बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाई गई हैं। यादव ने बताया बेटी के नाम की नेम प्लेट सिर्फ घर की पहचान नहीं बदलती, बल्कि परिवार की सोच में बदलाव का संदेश भी देती है। कई परिवार बेटी के नाम से घर की पहचान कराने में झिझकते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। लोग स्वयं अपनी बेटियों के नाम की नेम प्लेट बनवाने की इच्छा जता रहे हैं।
यादव ने बताया बेटियों के जन्म पर लोग खुशियां मनाने लगे हैं। अभियान के दौरान कई परिवारों में बेटियों के जन्म पर स्वागत कार्यक्रम भी किए जा रहे हैं। बेटियों को बाजे-गाजे के साथ घर लाया जाता है। घर आने पर उसका स्वागत-सत्कार और नाच-गाकर खुशी मनाई जाती है। बेटियों को लेकर परिवार और समाज में सकारात्मक माहौल बन रहा है।
बडोरा निवासी भरत डोंगरे ने बताया बेटी के नाम की नेम प्लेट लगने से हमें गर्व महसूस होता है। पहले घर की पहचान पिता या बेटे के नाम से होती थी, लेकिन अब हमारी बेटी भी हमारे परिवार की पहचान है। इससे बेटी को भी अपने घर और परिवार से जुड़ाव का एहसास होता है। सदर निवासी अजय यादव ने बताया बेटी के जन्म को लेकर अब सोच बदल रही है। बेटी के नाम से घर की पहचान होना हमारे लिए सम्मान की बात है। इससे समाज में यह संदेश जाता है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।