बेतुल

रेशम उत्पादक कंपनी बनाकर लिखी विकास की इबारत

आदिवासी महिलाओं ने बनाई कंपनी, हर साल लाखों रुपए हो रही है आमदनी

2 min read
Nov 14, 2021

बैतूल. बैतूल जिले में रेशम उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए चार विकासखंडों के 40 जनजातीय बाहुल्य गांवों की 755 जनजातीय किसान महिलाओं ने रेशम उत्पादक कंपनी (एफपीओ) का गठन किया है। प्रत्येक किसान महिला एक एकड़ में शहतूत पौधरोपण से लगभग 70 से 80 हजार रुपए की वार्षिक आमदनी प्राप्त कर रही हैं।

प्रदेश में रेशम उत्पादन के क्षेत्र में जनजातीय महिलाओं द्वारा बनाई गई यह कंपनी स्वयं में अनूठी है। कंपनी को दिल्ली में ऑल इंडिया बिजनेस डेवलपमेंट एसोसिएशन द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। जिले के जनजातीय बाहुल्य घोड़ाडोंगरी, शाहपुर, चिचोली एवं बैतूल विकासखंड के 40 गांवों की जनजातीय महिलाओं द्वारा 2016 में सतपुड़ा वूमन सिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड पंजीकृत कराई गई, जिसका मुख्यालय पाढर में है।

इस कंपनी में 755 रेशम उत्पादक जनजातीय किसान महिलाएं अंशधारक के रूप में शामिल हैं। इन किसान महिलाओं के परिवार एक एकड़ सिंचित भूमि में शहतूत का पौधरोपण कर वर्ष में चार बार शहतूत की पत्ती की पैदावार करके शहतूत रेशम कीटपालन द्वारा कोया की फसल का उत्पादन करते हैं। जिससे एक महिला के परिवार को 70 से 80 हजार रुपए की वार्षिक आमदनी होती है। शहतूत का एक बार पौधरोपण 15 वर्ष तक गुणवत्तापूर्ण पत्तियों की उत्पादकता देता है। इन किसान महिलाओं द्वारा उत्पादित कोया कंपनी द्वारा 400 रुपए प्रतिकिलो तक की दर से खरीदा जाता है।

कंपनी द्वारा जिले में रेशम गतिविधियों को बढ़ाने के उद्देश्य से कंपनी द्वारा पूंजी भी व्यय की गई है, जिससे घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत के ग्राम छुरी, शाहपुर जनपद पंचायत के ग्राम खोकरा, रामपुर, भग्गूढाना एवं आवरिया तथा बैतूल विकासखंड के ग्राम सिल्लौट, झाडक़ुण्ड एवं ग्यारसपुर में आठ चॉकी कृमि पालन भवन स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा शाहपुर विकासखंड अंतर्गत रामपुर में दो एवं सेहरा में एक रीलिंग यूनिट की भी स्थापना की गई है। जिनके माध्यम से किसानों को उचित दर्जे की चाकी देकर गुणवत्तापूर्ण कोया का उत्पादन किया जाता है। जिले के जनजातीय विकासखंडों में शहतूत उत्पादन से जुड़े इन आदिवासी परिवारों में समृद्धि आ रही है एवं इनका अन्य स्थानों पर रोजगार के लिए पलायान भी रूका है।

शहतूत उत्पादन से जुड़ी जनजातीय महिलाओं के प्रत्येक के खेत में रेशम विभाग द्वारा एक लाख 37 हजार 500 की लागत वाले कृमि पालन भवन बनवाए गए है। इसके अलावा प्रत्येक हितग्राही को 37 हजार पांच सौ रुपए के कृमि पालन उपकरण, 18 हजार 750 रुपए लागत की सिंचाईं सुविधाएं एवं 15 हजार लागत मूल्य के पांच हजार पांच सौ पौधे शहतूत के पौधे उपलब्ध कराए गए है। इनके द्वारा उत्पादित रेशम कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, बंगाल एवं तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी विक्रय के लिए भेजा जाता है। वहीं कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस द्वारा विगत दिनों को चॉकी केन्द्र छुरी एवं रेशम धागा निर्माण ईकाई रामपुर का निरीक्षण भी किया गया था।

Published on:
14 Nov 2021 01:26 pm
Also Read
View All