भाजपा के दबाव में नहीं हो सका उनका नामांकन
भदोही. जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी श्याम कुमारी मौर्य नामांकन नहीं कर पाई जिसके बाद उन्होंने मतदान के बहिष्कार का फैसला लिया है। उनका कहना है कि भाजपा के दबाव में उनके प्रस्तावक और अनुमोदक मोबाइल बंद कर गायब हो गए थे जिसके कारण वह अपना नामांकन नहीं कर सकीं, इसलिए उन्होंने मतदान के बहिष्कार का फैसला लिया है।
गौरतलब हो कि जिला पंचायत सदस्य श्याम कुमारी मौर्या भदोही के वरिष्ठ सपा नेता कुंवर प्रमोद चंद्र मौर्या की बहू है। सपा ने उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी घोषित किया था, जिसके बाद वह समर्थन मांगने के लिए जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क में जुटी थी। सपा ने दावा किया था कि जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते 10 सदस्य उनके पार्टी के हैं और करीब-करीब सभी पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं। ऐसे में उनके पास संख्या बल है और वह अध्यक्ष पद का चुनाव जरूर जीतेंगे। लेकिन नामांकन के दिन बड़ा उलटफेर देखने को मिला और सपा प्रत्याशी अपना नामांकन ही नहीं दाखिल कर पायीं।
इसे लेकर श्याम कुमारी मौर्या ने बयान जारी करते हुए बताया कि वह नामांकन करने के लिए तैयार थी और उन्होंने जब प्रस्तावक और अनुमोदक को फोन मिलाना शुरू किया तो दोनों लोगों का नंबर बंद बता रहा था। उन्होंने आशंका जताई है कि भाजपा प्रत्याशी और भाजपा विधायक के परिवार के प्रत्याशी के दबाव के कारण उनके प्रस्तावक का मोबाइल बंद हो गया जिससे वह अपना नामांकन नहीं कर सकीं। इसलिए अब चुनाव में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा के ही प्रत्याशी मैदान में हैं और वह पक्के समाजवादी होने के कारण मतदान का बहिष्कार बहिष्कार करेंगी।
अगर श्याम कुमारी मौर्या मतदान का बहिष्कार करती हैं तो चुनाव में 26 की जगह 25 मतों पर ही फैसला होगा। गौरतलब हो कि चुनावी में भाजपा की तरफ से अमित सिंह और भाजपा विधायक अनिरुध्द त्रिपाठी मैदान में हैं। विधायक के एक भतीजे चंद्रभूषण त्रिपाठी ने भी नामांकन किया है और माना जा रहा है कि वो अपना नामांकन वापस ले लेंगे।