
चेन्नई। इस साल दीपावली पर पटाखों की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा रही है। देश की पटाखा राजधानी कहे जाने वाले शिवकाशी में पटाखा निर्माता लागत में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। कच्चे माल और परिवहन की बढ़ती कीमतों ने उत्पादन लागत को प्रभावित किया है। साथ ही सुरक्षा उल्लंघन के चलते फैक्ट्रियों के लंबे समय तक बंद रहने से उत्पादन क्षमता भी घटी है, जिससे त्योहार के दौरान पटाखों की कमी और मांग में उछाल की संभावना पैदा हुई है।
तमिलनाडु फायर वर्क्स एंड अमोर्सेस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेशन पांजुराजन ने बताया, इस साल कच्चे माल की लागत में 17 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। ज्यादातर सामग्री आयात की जाती है, लेकिन जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण उनका आगमन देर से हो रहा है। उन्होंने आगे कहा सल्फर, जो पटाखों के लिए जरूरी है, उसकी कीमत में 250 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
स्माल क्रैकर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जी. विनायकमूर्ति के अनुसार, छोटे निर्माता तेलंगाना और महाराष्ट्र से कच्चा माल लाते हैं, जहां ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इस कारण घरेलू खरीदी पर भी खर्च बढ़ा है। पटाखों के दाम 20 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं और दीपावली तक 30 प्रतिशत तक पहुंच सकते हैं। विनायकमूर्ति ने आगे बताया सुरक्षा उल्लंघन के कारण लाइसेंस निलंबन की लंबी प्रक्रिया के चलते अब तक केवल 60 प्रतिशत उत्पादन ही पूरा हो सका है।
कई निर्माता बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन कर रहे हैं ताकि उपभोक्ताओं पर पूरी बढ़ोतरी का बोझ न पड़े। पटाखा व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण इस बार दीपावली पर खरीदारी में गिरावट की आशंका है। तमिलनाडु फायर वर्क्स ट्रेडर्स फेडरेशन के एक प्रतिनिधि ने कहा, निर्माताओं ने औसतन 20 प्रतिशत दाम बढ़ाए हैं। कच्चे माल की कमी और कम उत्पादन के कारण हमें भी महंगे दामों पर खरीदारी करनी पड़ रही है।
स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, मांग बढ़ने और आपूर्ति कम होने से थोक दरें 25 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। ग्राहकों में भी बढ़ती कीमतों के कारण संकोच देखा जा रहा है। कई नियमित ग्राहक अब थोक में खरीदारी से बच रहे हैं। पटाखा उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि अभी उत्पादन प्रक्रिया में देरी और कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से दीपावली पर उपभोक्ताओं को जेब ढीली करनी पड़ सकती है।