
Indira Ekadashi : सनातन संस्कृति के माननेवालों के लिए 6 अक्टूबर का दिन बड़ा अहम है। इस दिन आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी है जिसे इंदिरा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी को पितरों की मुक्ति के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है। ज्योतिषिय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत करने वाले लोगों का कोई पूर्वज भूलवश किए गए अपने पाप कर्मों के लिए यमराज की सजा भुगत रहा हो तो इस व्रत के प्रभाव से उसे इस दंड से मुक्ति मिल जाती है। इस बार यह एकादशी मंगलवार को पड़ रही है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा फलदायी होती हे। इससे वाहन, धन सहित सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
हमारे पूर्वजों को उनके पाप कर्म से मुक्त कर देता है व्रत
श्राद्ध पक्ष में पडऩे के कारण इंदिरा एकादशी को श्राद्ध एकादशी भी कहते हैं। पितृपक्ष में इस एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है। इस दिन का व्रत हमारे पूर्वजों को उनके पाप कर्म से मुक्त कर देता है। इसके साथ ही उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके बताते हैं कि एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर सबसे पहले सूर्यदेव को जल अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। दोपहर में अपने पितरों का श्राद्ध करें।
इसके बाद ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को भोजन करवाएं और उन्हें यथायोग्य दक्षिणा दें। दिन में केवल एक बार ही भोजन करें। अगले दिन सुबह एकादशी के व्रत का पारण करें।
एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा फलदायी होती है। विधिवत पूजा के साथ ही इस दिन विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ जरूर करें। इससे वाहन, धन सहित सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की यह एकादशी जहां पितरों को मोक्ष दिलाती है वहीं व्रत रखनेवालों को दुखों से मुक्त करती है। इस दिन विष्णुजी की पूजा के साथ भक्ति भाव से लक्ष्मीजी की पूजा भी करना चाहिए। उनके आशीर्वाद से घर, धन धान्य से परिपूर्ण होता है।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 6 अक्टूबर को रात 02:07 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे
उदया तिथि के अनुसार एकादशी व्रत 6 अक्टूबर को
शुभ योग: सुबह 06:17 बजे से रात 10:17 बजे तक