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और शुभ फलदायी हो सकती है श्राद्ध पक्ष पूर्णिमा, 60 साल बाद फिर बना दुर्लभ ग्रह-गोचर

Shraddh Paksha Purnima : शनिवार से श्राद्धपक्ष पूर्णिमा, हार्वेस्ट मून व पितृकर्म का विशेष संयोग 6 दशक बाद, 1966 के बाद 2026 में दोहराएगी ग्रह स्थिति
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Sep 18, 2026
Shradh Paksha
Shraddh Paksha Purnima - फोटो सोर्स AI Grok

Shraddh Paksha Purnima : भारतीय ज्योतिष और खगोलीय घटनाक्रम के दृष्टिकोण से इस बार श्राद्धपक्ष का आरंभ विशेष संयोग के साथ हो रहा है। श्राद्धपक्ष शनिवार, 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस बार पूर्णिमा तिथि अपनी पूर्णता के साथ रहेगी। उज्जैन के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, करीब छह दशक बाद यह दुर्लभ ग्रह गोचर बन रहा है। श्राद्धपक्ष पूर्णिमा पर ग्रहों के संचरण की ऐसी स्थिति बन रही है, जैसी वर्ष 1966 में बनी थी। इस कारण श्राद्ध पूर्णिमा को ज्योतिषीय और खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सूर्य-बुध का कन्या राशि में, मंगल-गुरु का कर्क राशि में तथा चंद्रमा-शनि का मीन राशि में गोचर

उज्जैन के विख्यात ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार, 2026 में सूर्य-बुध का कन्या राशि में, मंगल-गुरु का कर्क राशि में तथा चंद्रमा-शनि का मीन राशि में गोचर रहेगा। ग्रहों के संचरण की यह स्थिति वर्ष 1966 में भी बनी थी। लगभग 60 वर्ष बाद समान ग्रह- स्थिति का दोहराव इस पूर्णिमा को विशेष बनाता है।

शरद विषुव के निकट पूर्णिमा यानी हार्वेस्ट मून

खगोलीय विज्ञान में शरद विषुव के सबसे निकट आने वाली पूर्णिमा को 'हार्वेस्ट मून' कहा जाता है। यह शरद ऋतु के आगमन से जुड़ी खगोलीय घटना है। इस समय चंद्रमा पूर्ण कलाओं से युक्त रहता है।

पूर्णिमा के दौरान चंद्रमा और प्रमुख ग्रहों का संचरण भी विशेष स्थिति निर्मित कर रहा

पं. अमर डब्बावाला के अनुसार, इस बार पूर्णिमा के दौरान चंद्रमा और प्रमुख ग्रहों का संचरण भी विशेष स्थिति निर्मित कर रहा है। पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र क्षेत्र में चंद्रमा का संचरण इस खगोलीय संयोग को और महत्वपूर्ण बनाता है।

2026 की श्राद्ध तिथियां

26 सितंबर (शनिवार): पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर (रविवार): प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर (सोमवार): द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर (मंगलवार): तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर (बुधवार): चतुर्थी श्राद्ध
1 अक्टूबर (गुरुवार): पंचमी श्राद्ध
2 अक्टूबर (शुक्रवार): षष्ठी श्राद्ध
3 अक्टूबर (शनिवार): सप्तमी और अष्टमी श्राद्ध (तिथि क्षय के कारण एक ही दिन)
4 अक्टूबर (रविवार): नवमी श्राद्ध (मातृ नवमी)
5 अक्टूबर (सोमवार): दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर (मंगलवार): एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर (बुधवार): द्वादशी श्राद्ध / संन्यासी श्राद्
8 अक्टूबर (गुरुवार): त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर (शुक्रवार): चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर (शनिवार): सर्वपितृ अमावस्या (महालय अमावस्या)

Updated on:
18 Sept 2026 04:53 pm
Published on:
18 Sept 2026 04:47 pm