Bengal SIR: अगला चरण अपील की सुनवाई का है, जिसके लिए 19 अलग-अलग समितियां बनाई गई हैं। लेकिन अब तक सिर्फ एक ही मामले की सुनवाई हुई है।
West Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अब करीब हैं और राज्य में राजनीतिक माहौल तेजी से गरम हो रहा है। राज्य में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले, अब सबसे बड़ा विवाद 'वोटर लिस्ट' को लेकर खड़ा हो गया है। इसी बीच, मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया पर आज 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद अहम सुनवाई होने जा रही है, जिस पर लाखों मतदाताओं का भविष्य टिका है।
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में Article 142 के तहत हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच बने भरोसे के संकट को दूर करने की कोशिश की थी। कोर्ट का उद्देश्य था कि कोई भी वैध मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। हालांकि, अदालत के इस हस्तक्षेप और कई आदेशों के बावजूद एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। SIR प्रक्रिया के तहत अंतिम सूची में से करीब 60 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें से लगभग 33 लाख नाम बहाल होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि 27 लाख लोग अब भी बाहर रह सकते हैं।
20 फरवरी के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट को 530 न्यायिक अधिकारियों की टीम गठित करने का निर्देश दिया था। बाद में इस संख्या को बढ़ाकर 700 कर दिया गया, जिसमें ओडिशा और झारखंड से 200 अतिरिक्त अधिकारियों को शामिल किया गया, ताकि लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज की जा सके। अब तक निपटाए गए करीब 55 लाख मामलों के आधार पर अनुमान है कि लगभग 45% मामलों में नाम बाहर रह सकते हैं।
अगला चरण अपील की सुनवाई का है, जिसके लिए 19 अलग-अलग समितियां बनाई गई हैं। लेकिन अब तक सिर्फ एक ही मामले की सुनवाई हुई है। नियमों के मुताबिक 6 और 9 अप्रैल के बाद नामांकन की आखिरी तारीख खत्म होते ही वोटर लिस्ट फाइनल हो जाएगी। ऐसे में अगर समय पर फैसले नहीं हुए, तो जिन लोगों के नाम जुड़े या हटाए जाने हैं, वे वोट देने से वंचित रह सकते हैं। इससे बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि अगर नई वोटर लिस्ट समय पर तैयार नहीं होती, तो पुरानी मान्य सूची स्पेशल समरी रिविजन 2025 के आधार पर ही चुनाव कराए जा सकते हैं। साथ ही जिन लोगों के आवेदन लंबित हैं, उन्हें अस्थायी रूप से वोट देने की अनुमति दी जा सकती है, जबकि अंतिम फैसला बाद में अधिकारी तय करेंगे।