
Religious Places Loudspeaker: पश्चिम बंगाल में सभी धार्मिक स्थलों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के राज्य सरकार के आदेश को वापस लेने की मांग को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। सोमवार को यह याचिका हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष दायर की गई। यह याचिका तृणमूल कांग्रेस के चार बार के लोकसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने खुद वकील डेनिश फारूकी की ओर से दाखिल की है।
याचिका में धार्मिक स्थलों, खासकर मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने के आदेश के कानूनी आधार पर सवाल उठाया गया है। कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने की कार्रवाई पुलिस की ओर से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के मौखिक आदेश के आधार पर की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी आधिकारिक आदेश या मेमो के पुलिस की ओर से कार्रवाई की गई।
बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार के दौर में यह एक नया चलन बन गया है, जहां मुख्यमंत्री कुछ कहते हैं और पुलिस बिना आधिकारिक आदेश या मेमो जारी हुए उस पर अमल करती है।
कलकत्ता हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका स्वीकार कर ली है। हालांकि, मामले की पहली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच में भी एक अलग याचिका दाखिल की गई। इसमें मस्जिदों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाए जाने के हालिया घटनाक्रम के विरोध में मंगलवार को प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई है। यह प्रस्तावित रैली उत्तर कोलकाता के राजाबाजार से मध्य कोलकाता स्थित रानी रासमणि रोड तक निकाले जाने की मांग की गई है।
यह याचिका अब्दुल समद नाम के एक व्यक्ति की ओर से दाखिल की गई है। उनकी ओर से अधिवक्ता और CPI(M) नेता सब्यसाची चट्टोपाध्याय ने पैरवी की है। इस मामले पर जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच सोमवार को बाद में सुनवाई कर सकती है।
इससे पहले विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने के नाम पर खास तौर पर मस्जिदों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। हालांकि, मुख्यमंत्री अधिकारी ने स्पष्ट किया था कि यह कार्रवाई केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, यह नियम मंदिरों समेत सभी धार्मिक स्थलों पर लागू है।