
Pradosh Vrat : शिव भक्तों के लिए 8 अक्टूबर 2026 का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन माह का पहला प्रदोष व्रत रहेगा। खास बात यह है कि प्रदोष गुरुवार के दिन पड़ रहा है। इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है जोकि शिव पूजन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। यही कारण है कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष के प्रदोष की महत्ता बढ़ गई है। इस दिन शिव और बृहस्पति की पूजा का त्वरित फल मिल सकता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि गुरु प्रदोष पर व्रत रखकर भगवान शिव और देवगुरु की पूजा अर्चना करना बहुत शुभ होता है। इस दिन माता पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए। यूं तो प्रत्येक प्रदोष पर भगवान शिव की उपासना की जाती है लेकिन गुरु प्रदोष की अलग ही महत्ता है। मान्यता है कि गुरु प्रदोष पर व्रत रखने और शिवपूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके के अनुसार गुरु प्रदोष पर शिवजी की पूजा पूरे परिवार सहित अर्थात् शिवलिंग, माता पार्वती, कार्तिकेयजी, गणेशजी और उनके वाहन नन्दी के साथ की जानी चाहिए। शिवजी की पूजा में गंगाजल का उपयोग जरूर करें।
पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि शिव पूजा सामग्री में उनकी प्रिय वस्तुएं भांग, धतूरा आदि भी रख सकते हैं पर बिल्वपत्र जरूर रखें। इसके अलावा जल, दूध, दही, घी, शहद, पंचामृत, कलावा, वस्त्र, जनेऊ, चन्दन, रोली, चावल, फूल, दूर्वा, फल, आक, कमल−गट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, धूप, दीप आदि भी रखना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित के अनुसार गुरुवार को सुबह स्नान करके साफ कपड़े धारण करें। पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें। दीपक जलाएं और भगवान शिव की विधि विधान से पूजाकर उनके मंत्र जाप करें। ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप जरूर करें। शिवलिंग पर जल जरूर अर्पित करना चाहिए। मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल व दूध का अभिषेक करें। संभव हो तो रात्रि में आसन बिछा कर सोना चाहिए।
प्रदोष व्रत में प्रदोष काल यानि सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले के समय में शिव पूजा की जाती है। शिवलिंग का अभिषेक कर बेलपत्र अर्पित करना बेहद शुभ फलदायक माना जाता है। गुरु प्रदोष के खास अवसर पर पीला चंदन, शहद और पंचामृत भी अर्पित कर सकते हैं।
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 7 अक्टूबर को रात 11:16 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 8 अक्टूबर को रात 10:15 बजे
प्रदोष व्रत: 8 अक्टूबर को
पूजा मुहूर्त: शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक