भरतपुर

Atar Singh Bhadana Death : BJP से ‘शानदार’ जीत, कांग्रेस से ‘बुरी’ हार, जानिए Ex-MLA अतर सिंह भड़ाना का उतार-चढ़ाव भरा राजनीतिक सफर 

Rajasthan Politics : भरतपुर के बयाना के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना का क्रेशर प्लांट पर हुए हमले के बाद निधन हो गया। जानिए उनका पूरा राजनीतिक सफर और निधन से जुड़ी खास बातें।
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Oct 12, 2026
atar singh badana political profile and death
Atar Singh Badana - File PIC

राजस्थान की राजनीति और भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र से एक दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है। भरतपुर जिले की बयाना विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रहे अतर सिंह भड़ाना का अक्टूबर 2026 में एक हिंसक हमले के बाद निधन हो गया है। पूर्वी राजस्थान के एक प्रभावशाली गुर्जर नेता और राजनेता के रूप में अपनी खास पहचान रखने वाले भड़ाना पर हाल ही में उनके क्रेशर प्लांट पर लाठी-डंडों और हथियारों से लैस भीड़ ने जानलेवा हमला कर दिया था।

इस हिंसक झड़प में गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में भारी तनाव और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद पिछले करीब दो वर्षों से माइनिंग लीज और क्रेशर संचालन के रास्तों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और लीज संचालकों के बीच चल रहे गतिरोध का परिणाम था। 11 अक्टूबर 2026 की शाम को भरतपुर के वैर थाना क्षेत्र में स्थित उनके क्रेशर प्लांट पर करीब 70 से 80 लोगों की भीड़ ने अचानक हमला बोल दिया।

इस हमले के दौरान हुई भारी हिंसा और फायरिंग में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना और उनके बॉडीगार्ड गगन शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन दौसा जिले के महुवा के पास पहुंचने से पहले ही उन्होंने रास्ते में दम तोड़ दिया।

कौन थे अतर सिंह भड़ाना? राजनीतिक प्रोफाइल और सफर

अतर सिंह भड़ाना राजस्थान के पूर्वी हिस्से यानी मत्स्य और ब्रज क्षेत्र के एक कद्दावर और जमीन से जुड़े हुए नेता थे। भरतपुर जिले के गुर्जर बहुल इलाकों में उनकी मजबूत राजनीतिक और सामाजिक पकड़ मानी जाती थी। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ा और अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाया।

वे मुख्य रूप से राजस्थान विधानसभा के एक बार सदस्य (MLA) रहे थे। अपनी आक्रामक शैली और जनता के बीच मुखरता के कारण वे हमेशा चर्चा में रहते थे। हालांकि, राजनीति के साथ-साथ वे माइनिंग (खनन) और क्रेशर के व्यावसायिक कार्यों में भी बड़े स्तर पर सक्रिय रहे थे, जो बाद में उनके जीवन के अंतिम समय में विवादों की वजह भी बन गया।

साल 2003 का ऐतिहासिक चुनावी मुकाबला और बड़ी जीत

अतर सिंह भड़ाना के राजनीतिक जीवन का सबसे स्वर्णिम और ऐतिहासिक दौर साल 2003 का विधानसभा चुनाव था। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2003 में उन्होंने भरतपुर की बेहद महत्वपूर्ण बयाना विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में कदम रखा था।

इस कड़े मुकाबले में उन्होंने राजस्थान सामाजिक न्याय मंच (RSNM) के उम्मीदवार ध्रुवेंद्र सिंह को करारी शिकस्त दी थी। उस चुनाव में अतर सिंह भड़ाना को कुल 41,377 वोट मिले थे, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी ध्रुवेंद्र सिंह को 21,972 वोट हासिल हुए थे। भड़ाना ने यह चुनाव 19,405 वोटों के भारी-भरकम और ऐतिहासिक अंतर से जीता था। इस चुनाव की खास बात यह थी कि इसमें कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह सूपा तीसरे स्थान पर रहे थे।

पाला बदलना और राजनीतिक उतार-चढ़ाव

2003 में भाजपा के टिकट पर विधायक बनने के बाद अतर सिंह भड़ाना के राजनीतिक सफर में समय के साथ बदलाव भी आए। उन्होंने बाद के चुनावों में अपनी राजनीतिक रणनीतियों के तहत दल-बदल भी किया। वे कांग्रेस पार्टी में भी सक्रिय रहे और साल 2008 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नगर (Nagar) विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, उस चुनाव में उन्हें बेहद करीबी अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद पूर्वी राजस्थान की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।

माइनिंग व्यवसाय और स्थानीय स्तर पर रास्तों के विवाद को लेकर उपजा यह खूनी संघर्ष अब उनके जीवन के अंत का कारण बन गया। पुलिस इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और हमलावरों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। एक पूर्व विधायक और दिग्गज नेता की इस तरह से हुई आकस्मिक मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण इलाकों के सुरक्षा तंत्र पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Updated on:
12 Oct 2026 07:14 am
Published on:
12 Oct 2026 07:02 am