-सर्दी के बाद भी कबाडऩुमा कमरे में रह रही सुनीता
भरतपुर. सरकारी बदइंतजामी की पीर सह चुकी सुनीता के मर्ज को अब भी तंगहाली और बढ़ा रही है। यह सच है कि इस प्रकरण में आरबीएम अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही व प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा वह भुगत रही है, लेकिन अब कुछ स्वयंसेवी संगठनों ने भी महिला की सुध ली है। हालांकि यह भी आश्चर्य है कि तमाम स्वयंसेवी संगठन समाजसेवी संस्थाओं में से सिर्फ एक संगठन ने अभी तक महिला की सुध लेकर उसे जरुरत का सामान दिया है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने 18 नवम्बर के अंक में 'शर्मनाक प्लास्टर चढ़ा कर कह दिया बाहर कराओ ऑपरेशनÓ शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इसके बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और पीडि़ता महिला की सुनीता की खोज-खबर ली, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला, लेकिन पत्रिका ने तलाश कर महिला से बात कर अस्पताल प्रबंधन के झूठ को उजागर किया था।
स्वास्थ्य मंदिर संस्थान ने टीम भेजकर हाल-चाल जाना व गरीब परिवार की मदद की। टीम की सदस्य डॉ. सोनिया शर्मा ने कहा की सुनीता खेड़ली कस्बे की है। इसका दायां पैर टूटा हुआ है। पैर टूटने के कारण परेशानी हो रही थी। इस पर डॉ. सोनिया ने उन्हें दवाइयां दी व घर का राशन, कम्बल व अन्य जरुरत की साम्रगी भेंट की तथा कहा की भविष्य में भी स्वास्थ्य मंदिर सहयोग प्रदान करता रहेगा। बताते हैं कि करीब सात दिन पूर्व खेरली के पास सड़क दुर्घटना में सुनीता का पैर टूट गया था। यहां उसे इलाज के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। अस्पताल प्रशासन की अनदेखी के चलते उसे निजी अस्पताल में उपचार कराना पड़ा था। इसके लिए उसने अपने गहने गिरवी रखकर पैसों का इंतजाम किया था। खास बात यह है कि सुनीता की पीर का मामला पत्रिका में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में मामले की जांच करा दी और खुद को क्लीन चिट दे दी। अब दुबारा जांच कराने का भी दावा किया जा रहा है। वहीं अगर रिपोर्ट के मामले में नजर डालें तो हर बार सरकारी अस्पताल में विवाद या हंगामा होने पर जांच के नाम पर खानापूर्ति का खेल चलता है। इस प्रकरण में सबकुछ ऐसा ही हो रहा है।
जिला कलक्टर बोले: महिला सुनीता की की जाएगी हरसंभव मदद
पत्रिका ने जब इस प्रकरण को लेकर जिला कलक्टर नथमल डिडेल से बात की तो उन्होंने कहा कि लुपिन के माध्यम से महिला की आर्थिक मदद कराई जाएगी। इसके लिए 22 नवंबर को सुबह संबंधित संस्था से बात की जाएगी। महिला का अस्थायी पता भी जुटा लिया गया है। महिला की आर्थिक सहायता के साथ अन्य मदद के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर से महिला सुनीता के प्रकरण को लेकर अभी तक दूसरी रिपोर्ट को लेकर भी कुछ तय नहीं हो सका है। वहीं जब कार्यवाहक पीएमओ डॉ. केसी बंसल से बात की तो उन्होंने कहा कि अभी तबियत खराब है। इसलिए दुबारा से रिपोर्ट नहीं पाए हैं।