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Bharatpur Crime : न्याय की आस में एक माह तक नहीं नहाई बलात्कार पीड़िता, छोटे भाई की वजह से पलटा केस, कोर्ट नाराज

Bharatpur Crime : भरतपुर में पुलिस लापरवाही की हद कर दी। कमाल की बात है कि बलात्कार केस में न्याय की आस में एक माह तक पीड़िता नहीं नहाई। कोर्ट में पीड़िता के 10 वर्षीय भाई की वजह से अचानक पलट गया पूरा मामला।

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Bharatpur Crime Rape victim did not bathe one month in hope of justice case suddenly turned around younger brother court displeased

फाइल फोटो पत्रिका

Bharatpur Crime : भरतपुर में पुलिस लापरवाही की हद कर दी। 13 वर्षीय बलात्कार पीड़िता न्याय की उम्मीद में एक माह तक नहाई तक नहीं, ताकि मेडिकल जांच में सबूत सुरक्षित रह सकें। इसके बाद भी पुलिस की कथित लापरवाही के चलते न तो समय पर मेडिकल कराया गया और न ही महत्वपूर्ण साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए। मामला तब पलटा, जब पीड़िता के 10 वर्षीय भाई की ओर से बनाया गया वीडियो कोर्ट में सामने आया। पोक्सो कोर्ट ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी को कड़ी फटकार लगाई।

पीड़िता पक्ष के अधिवक्ता विवेक हथैनी के अनुसार मामला 31 मार्च 2026 का है। आरोप है कि 75 वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी ने 13 साल की नाबालिग के साथ बलात्कार किया। घटना के समय घर पर मौजूद नाबालिग के 10 वर्षीय भाई ने छिपकर मोबाइल से वीडियो बना लिया। पिता मजदूरी पर बाहर गए थे, जबकि मां अन्य बच्चों के साथ जंगल में लकड़ियां लेने गई थी। मां के लौटने पर भाई ने वीडियो दिखाकर पूरी घटना बताई। इसके बाद 1 अप्रैल को मामला दर्ज कराया गया।

पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने से जमानत मिली

परिजनों का आरोप है कि थाना स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई। पुलिस ने न तो बच्ची का मेडिकल कराया और न ही वीडियो तथा जब्त कपड़ों को केस डायरी में शामिल कर कोर्ट में साक्ष्य के तौर पर पेश किया। इसके बाद 18 अप्रैल को आरोपी गिरफ्तार हुआ और 20 अप्रैल को कोर्ट में पेशी के दौरान पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने से उसे जमानत मिल गई।

परिजनों ने कोर्ट में दायर की याचिका

मामले में 22 अप्रैल को परिजन अधिवक्ता से मिले और कोर्ट में याचिका दायर की गई। पीड़िता ने कोर्ट में कहा कि उसे धमकाकर बयान बदलवाए गए। सुनवाई के दौरान एसएचओ ने कहा कि पीड़िता ने मेडिकल से मना किया था, इसलिए मेडिकल नहीं कराया।

एसएचओ को लगाई कड़ी फटकार

इस पर पोक्सो कोर्ट-1 के न्यायाधीश गिरजेश ओझा ने एसएचओ को फटकार लगाई और कोर्ट आदेश से मेडिकल कराने तथा जब्त कपड़े पेश करने के निर्देश दिए। आईजी के निर्देश के बाद थाने में रखे कपड़े मेडिकल जांच के लिए भेजे गए और 1 मई को पीड़िता का मेडिकल कराया गया।

कोर्ट के कहने पर बच्चे ने बनाया वीडियो, 15 मई को अगली सुनवाई

मामले में एक अहम मोड़ तब आया, जब कोर्ट ने 10 वर्षीय भाई को फोन देकर वीडियो बनाने को कहा। बच्चे ने कोर्ट रूम और वकीलों के वीडियो बनाकर दिखाए, जिससे यह साबित हुआ कि बच्चा घटना का वीडियो बना सकता था। अब मामले की अगली सुनवाई 15 मई की होगी।