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भरतपुर में चमत्कार : जिंदगी-मौत के बीच 7 महीने की गर्भवती शबाना की डिलीवरी, ICU में मां-बच्चे दोनों बचाए

Bharatpur : भरतपुर में चमत्कार। जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही सात माह की गर्भवती शबाना के लिए शुक्रवार का दिन किसी नई जिंदगी से कम नहीं रहा। जानें पूरा मामला।

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Miracle in Bharatpur Rajasthan Critical Pregnant Woman Gives Birth in ICU as Oxygen Levels Dropped

भरतपुर में उपचार करती चिकित्सकों की टीम। फोटो पत्रिका

Bharatpur : जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही सात माह की गर्भवती शबाना के लिए शुक्रवार का दिन किसी नई जिंदगी से कम नहीं रहा। बेहद गंभीर हालत और गिरते ऑक्सीजन लेवल के बीच आरबीएम अस्पताल की टीम ने जोखिम उठाते हुए आईसीयू में ही महिला की डिलीवरी कराई और मां-बच्चे दोनों को सुरक्षित बचा लिया। आमतौर पर प्रसव जनाना अस्पताल में कराए जाते हैं, लेकिन शबाना की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाना संभव नहीं था।

महिला को 29 अप्रेल को गंभीर स्थिति में आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसके शरीर पर लाल निशान थे और ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था। सांस लेने में दिक्कत के चलते उसे सी-पैप मशीन पर रखा गया। उस समय उसका ऑक्सीजन लेवल महज 88 तक पहुंच गया था। स्थिति लगातार बिगड़ने पर अस्पताल प्रशासन के सामने बड़ा सवाल था कि मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान कैसे बचाई जाए। एक समय ऐसा भी आया जब प्राथमिकता तय करनी पड़ सकती थी, लेकिन मेडिकल टीम ने मां की जिंदगी को प्राथमिकता देते हुए ऐसा उपचार प्लान बनाया, जिससे दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।

सहायक आचार्य डॉ. प्रियंका जोशी की देखरेख में पूरी तैयारी के साथ आरबीएम अस्पताल के आईसीयू में ही प्रसव कराने का फैसला लिया गया। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए दो घंटे पहले एंबुलेंस तैयार रखी गई, वाहन स्टार्ट मोड में रखा गया और शिशु रोग विशेषज्ञों को मौके पर बुला लिया गया।

सामान्य प्रसव कराने की बनाई रणनीति

डॉ. प्रियंका जोशी ने बताया कि शिशु के जन्म के बाद उसकी देखभाल बेहतर तरीके से संभव थी, इसलिए सामान्य प्रसव कराने की रणनीति बनाई गई। दर्द बढ़ाने वाली दवा देकर सफल डिलीवरी कराई गई। प्रसव डॉ. सौरभ चाहर ने यूनिट-2 की प्रभारी डॉ. प्रियंका जोशी की निगरानी में कराया। टीम में डॉ. दीपूदास, डॉ. जकारिया खान शिशु रोग विशेषज्ञ, डॉ. रचित मान मेडिसिन एवं रविन्द्र सिंह, वासु अनुराग आदि शामिल रहे।

प्राचार्य की देखरेख में चला महिला का उपचार

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. विवेक भारद्वाज के निर्देशन में चले उपचार के बाद अब शबाना का ऑक्सीजन लेवल 98 तक पहुंच गया है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शेखर शर्मा सहित पूरी टीम मौके पर मौजूद रही। अब मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। इस चुनौतीपूर्ण प्रसव ने एक बार फिर साबित किया कि संसाधनों और परिस्थितियों की कठिनाई के बावजूद डॉक्टरों की तत्परता जिंदगी को नया मौका देती है।

अपना घर से लाई गई महिला

महिला शबाना को पांच साल पहले लखनऊ से अपना घर में लाया गया था। इनका निकाह भी अपना घर की ओर से भरतपुर में ही कराया गया था। तबियत खराब होने की वजह से वर्तमान में शबाना अपना घर में रह रही थीं। यहां उनका उपचार चल रहा था। अचानक तबियत बिगड़ने पर अपना घर की संस्थापक डॉ. माधुरी भारद्वाज ने महिला को आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया और महिला की डिलीवरी होने तक देखरेख की।