Building Construction Expensive : राजस्थान के भरतपुर में अचानक बिल्डिंग मैटेरियल के दामों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। टाइल्स के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। जानें इसकी वजह क्या?
Building Construction Expensive : भरतपुर, पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब स्थानीय बाजारों में साफ नजर आने लगा है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव बिल्डिंग मैटेरियल, खासकर टाइल्स व्यापार पर पड़ा है। हालात ऐसे बन गए है कि जहां एक ओर टाइल्स के दामों में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है। वहीं दूसरी ओर नए माल की सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ गई है। इसका सीधा असर मकान बनाने वालों और निर्माण कार्यों पर देखने को मिल रहा है।
भरतपुर का टाइल्स बाजार मुख्य रूप से गुजरात के मोरबी जिले पर निर्भर हैं, जिसे देश का प्रमुख टाइल्स हब माना जाता है, लेकिन युद्ध के चलते गैस सप्लाई प्रभावित होने और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ने से वहां की टाइल्स फैक्ट्रियां बंद हो गई है। नतीजतन, मोरबी से नया माल आना पूरी तरह बंद हो गया है।
इसका असर यह हुआ है कि स्थानीय व्यापारियों को अब केवल पुराने स्टॉक के भरोसे काम चलाना पड़ रहा है। मांग बनी हुई है, लेकिन सप्लाई रुकने से कीमतों में तेजी आ गई है, जो टाइल्स पहले आसानी से उपलब्ध थीं, अब या तो महंगी हो गई है या बाजार में मिल ही नहीं रही है।
टाइल्स व्यापारी अनिल के अनुसार मोरबी से सप्लाई पूरी तरह बंद हो चुकी है, जो स्टॉक पहले से था, वही अब ऊंचे दामों पर बेचना पड़ रहा है। करीब 20 से 30 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ चुकी है और इसका असर आने वाले महीनों तक रहेगा।
बिल्डिग मैटेरियल व्यापारी मयंक जैन बताते हैं कि मोरबी की फैक्ट्रियां गैस आधारित है और गैस सप्लाई रुकने से उत्पादन ठप हो गया है। नया माल नहीं आ रहा, पुराने स्टॉक पर ही निर्भर है। यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो कीमतें और बढ़ेगी और ग्राहकों को मनपसंद टाइल्स मिलना भी मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है, जो लोग मकान निर्माण या रिनोवेशन की योजना बना रहे थे, उन्हें अब बढ़े हुए बजट का सामना करना पड़ रहा है। कई निर्माण स्थलों पर टाइल्स का काम फिलहाल रोक दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो इसका असर महज टाइल्स ही नहीं, बल्कि अन्य निर्माण सामग्री पर भी पड़ सकता है। फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल है. और आम उपभोक्ता महंगाई की सीधी मार झेल रहा है।