भरतपुर

‘नौकरी लगने से पहले अपना भविष्य क्यों खराब कर रहे हो’, गुर्जरों से ऐसा क्यों बोले IG राहुल प्रकाश?

भरतपुर रेंज आइजी राहुल प्रकाश मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद ट्रैक खुलवाया।

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Jun 09, 2025
Photo- Patrika

Gurjar MahaPanchayat: भरतपुर में बयाना के पीलूपुरा में रविवार को गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की महापंचायत में आरक्षण आंदोलन को समाप्त किए जाने घोषणा के बाद नाराज युवकों ने दिल्ली-मुम्बई रेलमार्ग पर कब्जा जमा लिया। इससे रेलवे विभाग और सरकार में हड़कंप मच गया।

एक ट्रेन को मौके पर आंदोलन करने वालों ने रोक दिया। सरकार विरोधी ताकतें आंदोलन कर रहे गुर्जरों को उग्र करने के लिए उकसाने में लगी थी। इसकी गंभीरता और दूरगामी परिणाम को समझते हुए भरतपुर रेंज आइजी राहुल प्रकाश मौके पर पहुंचे और अपनापन और समझाइश के बाद ट्रैक खुलावा दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आइजी सीधे ही पंडाल में धरने पर बैठे लोगों के बीच पहुंचे और उन्होंने कहा कि मैं आपकी बात सुनने और आपसे बात करने आया हूं। आप लोग एक तरफ पुराने मुकदमे हटाने की मांग कर रहे हो और वहीं दूसरी तरफ नए मुकदमे लगाने की तैयारी कर रहे हो। जो बच्चे ट्रैक पर गए हैं, उनके खिलाफ नए मुकदमे दर्ज हो सकते हैं। इससे नुकसान किसका होगा? उनका खुद का। एक मुकदमा दर्ज हो गया तो उन्हें जीवनभर सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।

आइजी ने विधायक अतुल प्रधान और वहां उपस्थित बुजुर्ग व गणमान्य लोगों को कहा कि सबसे पहले बच्चों को ट्रैक से यहां पंडाल में लेकर आएं। जब तक बच्चे यहां नहीं आते, तब तक मैं भी यहीं आप लोगों के साथ बैठा रहूंगा।

रेलवे ट्रैक से धरनास्थल पर लौटे युवाओं को कहा कि 372 (रीट) पदों पर नौकरी पर लगाने की मांग कर रहे हो और आप ही रेलवे ट्रैक रोक रहे हो। इस मामले में भी बातचीत चल रही है। रेलवे एक्ट में मुकदमा दर्ज हो जाएगा और फिर नौकरी नहीं मिलेगी। गांधीवादी तरीके को छोड़कर दूसरा तरीका अपनाएंगे तो आप अपना भविष्य खराब करेंगे।

पांच प्रतिशत आरक्षण मिलने के बाद देखो कि आपके कितने बच्चे आरएएस व आरपीएस बने व अन्य कितनी सरकारी नौकरी में आए। प्रगतिशील समाज को अब पीछे धकेलने का काम नहीं करना है। सरकार ने गुर्जर हितों से संबंधित विषय पर एक मंत्रिमंडलीय समिति का गठन कर रहे है जो स्थायी होगी। समिति हर तीन माह में मीटिंग करेगी। पहली मीटिंग इसी माह होगी। समिति में आपके भी प्रतिनिधि होंगे। सरकार, प्रशासन और समाज अलग-अलग नहीं है। हमने भी रोजगार के लिए संघर्ष किया है। इसलिए बेरोजगारी का दर्द समझते हैं।

Updated on:
09 Jun 2025 12:19 pm
Published on:
09 Jun 2025 10:09 am
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