1952 में लगाए गए जर्जर लोहे के पोल से ही चल रही है विद्युत व्यवस्था, कई बेजुबान एवं नागरिक हो चुके हैं शिकार
बाड़ी. कस्बा में विद्युत विभाग की लापरवाही किसी से छुपी हुई नहीं है। गलियों में झूलते हुए तार और घरों के आगे लगा जंपरों का जमावड़ा विभाग की लापरवाही को साफ बयां करता है। जिन लोगों के घरों के आगे जबरदस्ती जंपर डाल दिए गए हैंए उनकी शिकायत के बावजूद भी विभाग की ओर से कोई भी कार्रवाई नहीं की जाती। इसके चलते उक्त घरों में रहने वाले लोगों की जिंदगी पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। बात करें बाड़ी में विद्युत पोलों की तो यह लोहे के पोल 1952 के ही लगे हुए हैं। इनमें से अधिकतर की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। इनसे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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1952 में लगाए गए थे विद्युत पोल, अधिकतर हुए जर्जर
बाड़ी में विद्युत व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विभाग की ओर से 1952 में बड़ी संख्या में विद्युत पोल स्थापित किए गए थे। उक्त पोलो को लगभग 71 साल गुजरने के बाद भी बदलने की कोई कवायद शुरू नहीं की गई हैए जबकि अधिकतर लोहे के पोलो की हालत जर्जर हो चुकी है। इनसे आए दिन हादसे होते रहते हैं और कई हादसों को निमंत्रण भी दे रहे हैं।
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लोहे के पोलो पर रखा है ट्रांसफार्मर
भरद्वाज मार्केट में तो पूरा का पूरा ट्रांसफार्मर ही लोहे के जर्जर पोल पर रखा हुआ हैए जो कभी भी गिर सकता है। लोहे के पोल होने के कारण आए दिन इसमें करंट भी आता है। इसकी चपेट में जानवर तो आते ही हैं। कभी.कभार छोटे बच्चे और लोग भी इसकी चपेट में आ चुके हैंए जो करंट लगने से बुरी तरह से घायल भी हुए हैंए हालांकि विद्युत विभाग ने डीपी के चारों तरफ लोहे की जाली लगा दी हैए लेकिन वह कोई स्थाई समाधान नहीं है।
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बरसात के मौसम में खतरा अधिक
वैसे तो लोहे के पोल में कभी भी करंट आने की संभावना बनी रहती हैए लेकिन यह संभावना बरसात के मौसम में और बढ़ जाती है। बरसात के दिनों में कहार गली इलाके में पानी दुकानों के अंदर तक घुस जाता है ऐसे में इस तरह के विद्युत पोल होना हादसों को सीधे.सीधे दावत देता है।
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बाड़ीण् शहर के कायस्थ पा?ा पुलिया पर स्थित क्षतिग्रस्त विद्युत पोल।
बाड़ीण् शहर के हरिश्चंद्र दवाई वालों की दुकान के बगल में स्थित जर्जर विद्युत पोल।
बाड़ीण् मुख्य बाजार में स्थित क्षतिग्रस्त विद्युत का पोलए जो दीवार से सटा हुआ है।