
भरतपुर. सरकारी सिस्टम में लापरवाही की जंग कहां तक लग चुकी है इसका एक उदाहरण ऐतिहासिक सुजानगंगा नहर से जुड़े प्रकरण की पड़ताल करने पर सामने आया है। हुआ यूं कि सुजानगंगा नहर का मामला पिछले करीब 35 साल से न्यायिक प्रक्रिया में भी चल रहा है, लेकिन हर बार राज्य सरकार व संबंधित विभाग के अधिकारी न्यायालय में दावा करते रहे, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। अब सुजानगंगा नहर में मछलियों की मौत का मामला सुर्खियों में आने पर यह मुद्दा उठ रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले करीब 15 दिन से सुजानगंगा नहर में मछलियों के मरने का सिलसिला चल रहा है। अब सात नवंबर को पानी के सैंपल लिए गए हैं, जबकि हाइकोर्ट के स्पष्ट आदेश है कि सुजानगंगा नहर के पानी की जांच निरंतर कराई जाए।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ शर्मा ने बताया कि हाइकोर्ट की ओर से पिछले कुछ सालों के दौरान कितनी ही बार आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन उनकी पालना के नाम पर कुछ भी नहीं हो सका है। 31 जुलाई 2018 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इसकी सुनवाई की थी। इसमें राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिवक्ता ने एक महीने के अंदर पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित कानून की पालना कराने की बात कही थी। एनजीटी ने जिला कलक्टर को कहा था कि अतिक्रमण हटाए जाएं। सुजानगंगा के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाएं। यह कार्य एक महीने के अंदर कराया जाए। उस समय शहर के कचरे को यहां पर ही जलाने के लिए इंसीनेटर मशीन लगाने के आदेश दिए गए थे। ताकि कचरे को अलवर ले जाना नहीं पड़े। नगर निगम ने बजट की भी स्वीकृति दी, लेकिन जमीन का आवंटन नहीं होने के कारण आज तक कुछ नहीं हो सका। यह सारे प्रकरण एनजीटी के संज्ञान में भी लाए जा चुके। इस पर कोर्ट ने जिला पर्यावरण प्रदूषण राहत प्रोजेक्ट तैयार कने को कहा था। 26 सितंबर 2019 को आदेश दिया गया था। इसमें सोलिड वेस्ट, कंस्ट्रक्शन वेस्ट, बायो वेस्ट, ई-वेस्ट आदि को ध्यान में रखते हुए प्लान बनाना था, लेकिन यह आदेश भी क्रियान्वित नहीं हो सका। अब यह पूरा मामला हाइकोर्ट के प्रसंज्ञान में लाया जाएगा। ताकि उस पर सुनवाई हो सके और सुजानगंगा नहर को नए रूप में लाने का प्रयास किया जा सके।
बड़ा कदम...नहर के चारों ओर लगेगी लोहे की जाली
तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने सुजानगंगा नहर का निरीक्षण किया। उन्होंने आयुक्त नीलिमा तक्षक व मेयर अभिजीत कुमार से विस्तार से जानकारी ली। इसके अलावा नहर की सफाई को लेकर दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने घोड़ा घाट, खिरनी घाट आदि इलाकों से होकर नहर का जायजा लिया। आयुक्त नीलिमा तक्षक ने बताया कि सुजानगंगा नहर में दवाओं के छिड़काव से काफी हद तक बदबू कम हुई है। सुसाइड केसों को देखते हुए नहर के चारों ओर सात-आठ फुट की लोहे की जाली लगवाई जाएगी। यह काम अगले कुछ दिन में ही शुरू करा दिया जाएगा। इसके अलावा प्रोजेक्ट के लिए पीपीपी मोड के प्रोजेक्ट आदि को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को पत्र लिखा जाएगा। इसके अलावा रिट दायरकर्ता से भी बात की जाएगी।