भरतपुर

डीग के जलमहल: वर्षों पहले ही स्थापित कर दिए गए थे कलर फाउंटेन, अच्छे-अच्छे इंजीनियर तकनीक को आज भी करते हैं सलाम

जलमहलों में सालों पुराने इन फव्वारों के संचालन के लिए महलों की छत पर बनी टंकी में पानी भरा जाता है...

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Sep 16, 2023
डीग के जलमहल: वर्षों पहले ही स्थापित कर दिए गए थे कलर फाउंटेन, अच्छे-अच्छे इंजीनियर तकनीक को आज भी करते हैं सलाम

भरतपुर. जलमहलों की नगरी डीग (Deeg) में आयोजित श्री जवाहर प्रदर्शनी एवं ब्रजयात्रा मेला का अपना अलग ही इतिहास है, जहां आज भी मेला आयोजन के समय फव्वारों की छटाएं लोगों का मन मोह लेती हैं। मेले में शुक्रवार शाम को विश्व प्रसिद्ध जलमहलों में फव्वारों से निकली रंगीन जलधाराओं ने इंद्रधनुषी छटा बिखेर दी। सैकड़ों फव्वारों से बिखरी सतरंगी छटाओं ने दूरदराज क्षेत्रों से आए दर्शकों को उत्साहित कर दिया।
जैसे ही शाम करीब 5 बजे अलग अलग फव्वारों से जल की रंगीन धाराओं ने अठखेलियां की तो लोग खुशी से झूम उठे। जिसे बड़ी संख्या में दर्शकों ने अपने कैमरों में व मोबाइलों में कैद कर सेल्फी ली। कई उत्साही युवक रंगीन फव्वारों की इन्द्रधनुषी छटा के बीच पानी में उतरकर नाचते व पोज बनाकर फोटो ङ्क्षखचातें देखे गए। इस अवसर पर हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों ने रंगीन फव्वारों का लुफ्त उठाया।
रंगीन होकर अलग-अलग फाउंटेन से निकलती हैं जलधाराएं
जलमहलों में सालों पुराने इन फव्वारों के संचालन के लिए महलों की छत पर बनी टंकी में पानी भरा जाता है, जहां टंकी में बने गोलाकार सुरागों में रंग की पोटली रखी जाती है। जिससे पानी रंगीन होकर अलग-अलग फाउंटेन से निकलता है। इसका प्रेशर और कई रंगों की मिलावट रंगीन नजारा बना देती है। शुक्रवार सांय जल महलों में रंगीन फव्वारों की अठखेलियों का बडी संख्या में आए लोगों ने जमकर लुफ्त उठाया। इधर रंगीन फव्वारों की इन्द्र धनुषीय छठाओं का दर्शकों ने मंत्रमुग्ध होकर आनंद उठाया।
डीग की वास्तुकला का प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से हवेलियों द्वारा किया जाता है जिन्हें भवन कहा जाता है। इन भवनों में गोपाल भवन, सूरज भवन, किशन भवन, नंद भवन, केशव भवन, हरदेव भवन शामिल हैं। संतुलित रूपरेखा, उत्कृष्ट परिमाप, लम्बे व चौड़े हॉल, आकर्षक तथा तर्कसंगत मेहराब, चित्ताकर्षक हरियाली, आकर्षक जलाशय तथा फव्वारों सहित नहरें इन महलों की ध्यानाकर्षक विशेषताएं हैं। डीग बागों का अभिविन्यास औपचारिक रूप से मुगल चारबाग पद्धति पर किया गया है तथा इसके बगल में दो जलाशय- रूप सागर तथा गोपाल सागर हैं। इसकी वास्तुकला प्रारम्भिक रूप से ट्राबीटे क्रम में है किन्तु कुछ जगहों पर चापाकार प्रणाली का भी प्रयोग किया गया है। अधिकांश तोरण पथ सजावटी स्वरूप के हैं क्योंकि प्रत्येक मेहराब, चाप-स्कंध आकार के शिला फलक को जोडकऱ बनाया गया है जो खम्भों से बाहर निकले हुए हैं। अलंकृत खम्भों पर टिकी हुई मेहराबें, बहुस्तंभी मंडप, चपटी छत वाली वेदिकाएं, छज्जे तथा बंगाल छतों वाले मंडप, दो-दो छज्जे, मध्यम संरचनात्मक ऊंचाइयां तथा खुला आंतरिक विन्यास इस प्रणाली की सामान्य विशेषताएं हैं।

Published on:
16 Sept 2023 07:05 pm
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