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Expressway: भरतपुर में ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का विरोध तेज, किसानों की चेतावनी- भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं

Beawar-Bharatpur Greenfield Expressway: ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध बढ़ता जा रहा है। किसानों ने जनसुनवाई के दौरान ज्ञापन देकर प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की।

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Beawar-Bharatpur Greenfield Expressway

एसडीएम को ज्ञापन सौंपते किसान। फोटो- पत्रिका

भरतपुर। ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर सरकार इसे विकास का बड़ा कदम बता रही है, लेकिन भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। बुधवार को राजीव गांधी सेवा केंद्र कंजौली पर आयोजित जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए और उन्होंने रूपबास एसडीएम विष्णु बंसल को ज्ञापन सौंपकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तुरंत निरस्त करने की मांग की। किसानों ने इस मौके पर स्पष्ट कहा कि प्रस्तावित ब्यावर-भरतपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना उनके क्षेत्र के किसानों और आने वाली पीढ़ियों के हितों के पूरी तरह खिलाफ है।

किसानों का कहना है कि इस परियोजना के लिए उनकी पुश्तैनी, उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि किसी भी हालत में नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह जमीन केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं है, बल्कि उनकी आजीविका का मुख्य साधन, उनकी पहचान और उनके बच्चों का भविष्य है। किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन बेचने या अधिग्रहण के लिए तैयार नहीं हैं, चाहे कितना भी मुआवजा क्यों न दिया जाए।

कई परिवारों के बेघर होने की स्थिति

किसानों ने आरोप लगाया कि इस परियोजना से सैकड़ों किसान और कई ग्रामीण परिवार बेघर होने की स्थिति में आ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे क्षेत्र में सिंचित और उपजाऊ कृषि भूमि मौजूद है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर सही तरीके से निरीक्षण किए बिना ही अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं। इससे ग्रामीण लोगों में गहरी नाराजगी और चिंता है।

गंभीर आर्थिक संकट

किसानों का कहना है कि यदि इस परियोजना के लिए उनकी जमीन ली जाती है तो खेती पर निर्भर परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। इससे न केवल उनकी आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि पूरे गांव का जीवन भी प्रभावित होगा और लोगों को पलायन तक करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इससे गांवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस मौके पर सूरज परमार, रामकिशन, विष्णु, कृष्णमुरारी, हरिचरन, हरवीर, शैलेंद्र, मानसिंह, सतीश, जीवन, मदनमोहन, योगेंद्र, गजराज सिंह, जीतेंद्र, रामकुमार, जगदीश, राहुल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।