झारखण्ड के जामताड़ा को देश में ऑनलाइन ठगी का मुख्य केन्द्र माना जाता है, इसी की तर्ज पर राजस्थान व हरियाणा का मेवात क्षेत्र साइबर अपराध का दूसरा बड़ा केन्द्र बनता जा रहा है।
भरतपुर. झारखण्ड के जामताड़ा को देश में ऑनलाइन ठगी का मुख्य केन्द्र माना जाता है, इसी की तर्ज पर राजस्थान व हरियाणा का मेवात क्षेत्र साइबर अपराध का दूसरा बड़ा केन्द्र बनता जा रहा है। इस बार सोशल नेटवर्किंग साइट व्हाट्स-अप की डीपी पर बेंगलूरू शहर पुलिस कमिश्नर की फोटो लगा लोगों से ठगी करने की वारदात से सुर्खियों में है। मेवात क्षेत्र में ऑनलाइन ठगी का धंधा किस तरह फल-फूल रहा है, इसका अंदाजा कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरू में दर्ज ऑनलाइन ठगी के ग्यारह हजार दर्ज मुकदमों में से करीब 800 मुकदमों के तार इस मेवात क्षेत्र से जुड़े का सामना आ रहा है। मामले में बेंगलूरू पुलिस ने गिरोह के आधा दर्जन लोगों को पकड़ा है। इनसे पूछताछ में कई खुलासे होने की उम्मीद है।
गौरतलब रहे कि मेवात क्षेत्र पहले नकली सोने की ईंट के जरिए देशभर में ठगी के मामले में बदनाम रहा है। ठगी का तरीका पुराना होने और कई गिरफ्तारी होने से गिरोहों ने वारदात का तरीका बदल दिया। सोने की ईंट के जगह उन्होंने एटीएम मशीनों को टारगेट करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही गिरोह के तकनीकी रूप से शातिर लोगों ने ऑनलाइन ठगी में हाथ आजमा शुरू कर दिया है। इसमें ज्यादातर युवा हैं और वह ज्यादा शिक्षित नहीं हैं। ठगी का यह धंधा उन्हें ज्यादा मुफीद लगा और इलाके के दूसरे गिरोह भी इस धंधे में आए गए। अब मेवात इलाके में एटीएम काटने के साथ ऑनलाइन ठगी का कारोबार जमकर फलफूल रहा है। भरतपुर पुलिस के लिए गिरोह की वारदातें लगातार परेशानी का सबब बनी हुई हैं। जिला पुलिस की 2020 की प्राथमिकताओं में से टटलूबाज एवं ओएलएक्स पर ठगी की वारदातों पर प्रभावी नियंत्रण रखने की रणनीति बना रही है।
सस्ती कार तो कोई स्वीमिंग पूल का निर्माण कराने का दे रहा झांसा
मेवात क्षेत्र के गिरोह पूरी तरह हाईटेक हो चुके हैं। गिरोह के लोग जस्ट डायल और ओएलएक्स के जरिए लोगों को फंसाते हैं। गिरोह के लोग सस्ते में कार, जनरेटर सेट, पंपसेट, प्लास्टिक दाना एवं सीसीटीवी लगवाने, शादी में डेकोरेशन, फोटोग्राफी, रंग-रौगन, भवन व स्वीमिंग पूल निर्माण कराने झांसा देकर बुलाते हुए हैं और लूट की वारदात को अंजाम देते हैं। यह गिरोह भरतपुर के अलावा अलवर एवं हरियाणा के नूंह, फिरोजपुर झिरका, पलवल और उत्तरप्रदेश में मथुरा का क्षेत्र में सक्रिय है। पहले सोने की ईंट, नकली नोट, वाहन की फिरौती वसूलने में शामिल थे अब इन्होंने तरीका बदल दिया। हाईटेक होते जमाने को देखते हुए गिरोह ने भी तरीका बदल दिया। अब गिरोह के लोग सामान खरीद-बेचने वाली साइटों पर सस्ती कार बेचने समेत अन्य कार्य कराने का झांसा देकर ग्राहकों को फंसाते हैं।
पुलिस को भी नहीं छोड़ रहा गिरोह
गिरोह ने शुरुआत में एनसीआर के लोगों को निशाना बनाया और धीरे-धीरे दक्षिण भारत तक जाल फैला दिया। इनके शिकार हुए लोगों में तेलंगाना, कर्नाटका, तमिलनाडु व महाराष्ट्र तक के लोग शामिल हैं। हाल ये है कि इन्हें पुलिस का खौफ कतई नहीं है। कुछ समय पहले कामां थाना क्षेत्र की धिलावटी चौकी प्रभारी रहे एएसआई हरभान सिंह की कार को बेचने के लिए एक वेबसाइट पर विज्ञापन तक दे दिया।
साइबर एक्सपर्ट नहीं, गिरोह पड़ रहा भारी
मेवात के ये गिरोह पूरी तरह से ऑनलाइन के जरिए वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस ने शुरुआत में लोगों को बचाने के लिए इलाके में प्रचार-प्रसार किया लेकिन वह अब खत्म सा हो गया। इसके बाद गिरोह वापस सक्रिय हो गया। वहीं, गिरोह पर नकेल कसने के लिए पुलिस के पास अलग से साइबर एक्सपर्ट टीम का अभाव है। पुलिस की साईक्लोन सेल ज्यादातर पुलिस के गंभीर अपराध और उनसे जुड़े केसों में ही उलझी रहती है। हाई-प्रोफाइल मामले में वह केवल मोबाइल नम्बर के नाम-पते और सिमकार्ड चालू है तो उसकी लोकेशन ही निकाल पाते हैं। इससे आगे स्थानीय पुलिस के कार्रवाई नहीं करने से गिरोह की वारदातें लगातार बढ़ रही हैं। हाल ये है कि मेवात क्षेत्र में प्रति सप्ताह 3 से 4 वारदात हो रही हैं।