-मेरठ की एक फर्म को दिया गया था 2018 में ठेका, बार-बार नोटिस देने के बाद भी पूरा नहीं हुआ काम
भरतपुर. नगर सुधार न्यास की ओर से दो साल गुजरने के बाद भी जोनल प्लान नहीं बनाया जा सका है। बताते हैं कि मास्टर प्लान बनने के बाद 121 दिन में ही जोनल प्लान तैयार होना था। यही कारण है कि इससे कृषि भूमि पर बसी आवासीय कॉलोनियों में नियमन नहीं हो पा रहा है। लैंड यूज चेंज समेत कई कार्य अटके हुए हैं। आवेदक पिछले लंबे समय से यूआईटी के चक्कर काट रहे हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष 2004 से चल रहे गुलाब कोठारी प्रकरण में उच्च न्यायालय मामले की सुनवाई के दौरान एक स्थगन आदेश जारी कर चुका है। इसमें कहा गया है कि जब तक किसी शहर या जमीन का जोनल एवं सेक्टर प्लान बनकर पास नहीं हो जाता है तब तक इस प्रकार की किसी भी जमीन पर आवेदक को पट्टा जारी नहीं किया जा सकता है। यहां यह बात साफ है कि यूआईटी में पट्टे बनाने का काम इसलिए ठप है कि यहां न तो जोनल प्लान बना है और न ही सेक्टर प्लान।न्यायालय के मार्गदर्शन के अनुसार यह दोनों प्लान बन कर पास नहीं होते हैं तब तक इस प्रकार की जमीन के कोई भी पट्टे जारी नहीं किए जा सकते।
मास्टर प्लान बनने के बाद तैयार किए जाने वाले जोनल प्लान में योजना में बेहतर रोड कनेक्टिविटी, आबादी के हिसाब से कई स्थानों पर नए सुविधा केंद्र विकसित किए जाने थे। इसके अलावा सड़क निर्माण, नई आवासीय योजनाएं, व्यावसायिक योजनाएं और जनसुविधाओं की कार्य योजना तैयार की जानी थी। जोनल प्लान को 11 चरणों में बांटा जाना था। इसमें प्रथम चरण में जोन की क्षेत्र सीमा, दूसरे चरण में योजना का आधारभूत मानचित्र और डाटा संग्रह का कार्य, तीसरे चरण में राजस्व नक्शे, नगर निगम बोर्ड, मुख्य संरचनाओं और भूमि के मूल टाइटल के हिसाब से रिपोर्ट बनानी थी। चौथे चरण में आधारभूत मानचित्र के अनुसार भौतिक सत्यापन किया जाएगा। पांचवें चरण में नगर नियोजन विभाग की ओर से अंतिम जोनल डवलपमेंट प्लान बनाया जाएगा। आपत्तियां व सुझाव भी आमंत्रित किए जाने थे। इस प्रकार के विकास व अन्य चरण व अंतिम 11वें चरण में जोनल डवलपमेंट प्लान राज्यस्तरीय भू उपयोग समिति के समक्ष पेश कर इसका प्रकाशन किया जाना था। उल्लेखनीय है कि नए आदेश के अनुसार ऐसी अनधिकृत कॉलोनियां या क्षेत्र जिनके ले-आउट प्लान अनुमोदित नहीं है, उनका नियमन उस क्षेत्र का जोनल डवलपमेंट प्लान तैयार कर विधिक प्रक्रिया के अनुसार अधिसूचित होने के बाद ही जोनल डवलपमेंट प्लान में प्रस्तावित सुविधाओं आदि की सुनिश्चितता करते हुए किया जाएगा। समस्त नगरीय निकाय ऐसे क्षेत्रों या कॉलोनियों में जोनल प्लान में मुख्य नगर नियोजक या उसकी ओर से अधिकृत तकनीकी व्यक्ति से समायोजन सुनिश्चित करेंगे। नगरों में मास्टर प्लान लागू हैं, उन नगरों में समस्त भू-रुपांतरण-ले-आउट प्लान अनुमोदन, पट्टा, भवन निर्माण की स्वीकृति की कार्यवाही मास्टर प्लान में दर्शाए गए भू-उपयोग व जोनल प्लान के कंट्रोल रेगुलेशन में मान्य शर्तों के आधार पर किए जा सकेंगे।
क्या है मामला
वर्ष 2004 से लंबित गुलाब कोठारी मामले में जोधपुर हाईकोर्ट ने 12 जनवरी 2017 को आदेश दिए. इस आदेश में भवन विनियमों के विपरीत निर्माण को नियमित नहीं करने, सामान्य परिस्थितयों में मास्टरप्लान में दर्शाए भू उपयोग से इतर भू उपयोग की स्वीकृति नहीं देने, पुराने मास्टरप्लान में दर्शाए खेल मैदान, पार्क और इकोलोजिकल जोन को उसी अनुसार यथावत रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी तय किया गया कि बगैर जोनल प्लान सबमिट किए लैंड यूज चेंज व नियमन नहीं हो सकेंगे। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी गया, लेकिन पूर्व के आदेश को ही यथावत रखा गया।
इन पर पड़ रहा असर...
लैंड यूज चेंज नहीं होने के कारण व्यावसायिक गतिविधियां शुरू नहीं हो पा रही है। पर्यटन को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। पूर्व में भूखंड खरीद चुके लोग उनका विक्रय भी नहीं कर पा रहे हैं। इससे प्रोपर्टी का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। साथ ही इतना समय गुजरने के बाद भी संवेदक के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना भी सवाल खड़े कर रहा है।
-मेरठ की एक फर्म को जोनल प्लान को कार्य दिया हुआ है। यह सही बात है कि फर्म को नोटिस भी दिए गए हैं। जिला कलक्टर भी निर्देशित कर चुके हैं। अब फर्म की ओर से कार्य किया जा रहा है।
उम्मेदीलाल मीणा
सचिव नगर सुधार न्यास
-जोनल प्लान को लेकर पिछले लंबे समय से लापरवाही बरती जा रही है। न्यायालय का स्पष्ट आदेश है कि बगैर जोनल प्लान सबमिट किए बिना लैंड यूज चेंज व पट्टे नहीं दिए जा सकेंगे। ऐसे में इतने में समय में यूआईटी की ओर से क्या किया गया है।
इंद्रपाल सिंह पाले
पूर्व डिप्टी मेयर नगर निगम