- आरबीएम प्रशासन ने की अनदेखी
भरतपुर. आरबीएम अस्पताल में रविवार को चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग सुविधाएं बढ़ाने का बखान करते रहे। उधर, एक वृद्ध पिता अपनी बेटी की जांच कराने के लिए उसे कंधे पर लेकर घूमता रहा। यह सब अस्पताल प्रशासन की नाक के नीचे हुआ, लेकिन 'मंत्रीजी की आवभगत में अस्पताल प्रशासन ने इसे तस्वीर को अनदेखा कर दिया। ऐसे में लाचार पिता दर-दर भटकता नजर आया।
जानकारी के अनुसार मिथलेश (35) पत्नी भरत सिंह निवासी नगला नंदराम की हाल ही में डिलेवरी हुई थी। प्रसव के दौरान मिथलेश के बीमार होने पर उसमें रक्त की कमी हो गई। इस पर मिथलेश को उसके पिता प्रेम सिंह (64) ने आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया। मिथलेश का आरबीएम की पांचवीं मंजिल पर भर्ती थी, जहां उसका उपचार चल रहा था। रविवार को वार्ड में ही चिकित्सक ने उसे ब्लड सहित अन्य जांच कराने का पर्चा थमा दिया। पिता अपनी बेटी को लेकर लिफ्ट के जरिए नीचे जांच कराने लाया। खास बात यह है कि भर्ती मरीज का न तो वार्ड में सेम्पल लिया गया और न ही उसे व्हील चेयर या स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया। ऐसे में वृद्ध पिता कुछ देर तक तो बेटी को पैदल ब्लड प्रयोगशाला में ले जाने लगा, लेकिन बीमारी के चलते मिथलेश ने पैदल चलने में असमर्थता जता दी। ऐसे में वृद्ध पिता अपनी बेटी को कंधे पर लादकर ब्लड प्रयोगशाला ले गया। खास बात यह है कि रविवार को आरबीएम में चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग का कार्यक्रम था। राज्यमंत्री यहां नई एम्बुलेंस, नेटल वेंटीलेटर एवं एनेस्थेसिया वर्क स्टेशन की नई मशीनों का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इसके लिए अस्पताल प्रशासन मंत्री की आवभगत के लिए तैयारियों में जुटा रहा। उधर लाचार पिता बेटी को कंधे पर लादकर घूमता रहा, लेकिन इस ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।
आवभगत में बिसरा दी पीड़ा
आरबीएम अस्पताल में जिस समय वृद्ध पिता अपनी बेटी को कंधे पर लादकर घूम रहा था, उस समय चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. गर्ग अस्पताल में मौजूद थे। एक ओर वृद्ध पिता विवाहित बेटी को कंधे पर लेकर घूम रह था। वहीं दूसरी ओर चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. गर्ग आरबीएम में बढ़ती सुविधाओं का बखान करते हुए राज्य सरकार की शान में कसीदे पढ़ रहे थे। अस्पताल प्रशासन ने भी इस पीड़ा को खूब अनदेखा किया। मंत्री की आवभगत के लिए अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रजत श्रीवास्तव, कार्यवाहक प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. केसी बंसल, मेडिकल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश गुप्ता, जनाना अस्पताल के प्रभारी डॉ. रूपेन्द्र झा सहित चिकित्सा विभाग का पूरा अमला मौजूद रहा, लेकिन किसी ने भी वृद्ध की पीड़ा जानने की जहमत नहीं उठाई।