
Rajasthan OBC Reservation : भरतपुर, धौलपुर और अब डीग जिले के जाटों को केंद्र सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी आरक्षण दिलाने की मांग करीब ढाई दशक से चल रही है। इस मांग की शुरुआत 1998 के आसपास हुई थी। उस समय डीग, भरतपुर जिले का हिस्सा था, लेकिन दो वर्ष पहले अलग जिला बनने के बाद वह भी इस आरक्षण आंदोलन का हिस्सा है। अब दिमाग में एक सवाल कौंधता है कि जब पूरे राजस्थान के जाटों को केंद्र व राज्य से जाटों को OBC Reservation दिया जाता है, तो भरतपुर, धौलपुर और डीग के जाटों को केंद्र OBC Reservation क्यों नहीं देती है। आखिर ऐसा क्या गुनाह हुआ है। समझिए पूरा कहानी।
जाट आरक्षण विवाद की पृष्ठभूमि 1999 से जुड़ी है। अगस्त 1999 में सीकर की एक चुनावी सभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जाटों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने का वादा किया था। इसके बाद 27 अक्टूबर 1999 को केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर कई क्षेत्रों के जाटों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया, लेकिन भरतपुर और धौलपुर को इससे बाहर रखा गया। तर्क यह दिया गया कि इन इलाकों के जाट पूर्व राजपरिवार से जुड़े रहे हैं, इसलिए वो सामान्य श्रेणी में आते हैं। जबकि आंदोलनकारी पक्ष का कहना रहा कि भरतपुर, धौलपुर के जाट मुख्यतः कृषक वर्ग से आते हैं और उन्हें इस आधार पर आरक्षण से वंचित रखना अनुचित है।
इसके बाद 3 नवंबर 1999 को तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने राज्य स्तर पर जाट समुदाय को ओबीसी में शामिल किया, पर भरतपुर और धौलपुर के जाट वंत्रित रह गए। जनवरी 2000 में राज्य सरकार ने अलग अधिसूचना जारी कर भरतपुर और धौलपुर के जाटों को भी राज्य OBC सूची में शामिल कर लिया।
2013 में मिला, 2015 में खत्म हुआ आरक्षण
वर्ष 2013 में केंद्र की तत्कालीन सरकार ने भरतपुर और धौलपुर सहित देश के 9 राज्यों के जाटों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करते हुए आरक्षण दिया था। लेकिन 2014 में केंद्र में सरकार बदलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और 10 अगस्त 2015 को भरतपुर, धौलपुर के जाटों का केंद्र और राज्य, दोनों स्तर पर ओबीसी आरक्षण समाप्त हो गया।
2017 में राज्य में बहाल, केंद्र में अब भी नहीं
लंबे आंदोलन और कानूनी राजनीतिक संघर्ष के बाद 23 अगस्त 2017 को तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने भरतपुर और धौलपुर के जाटों को राजस्थान की ओबीसी सूची में फिर शामिल कर आरक्षण बहाल कर दिया। हालांकि यह राहत केवल राज्य स्तर तक सीमित रही। केंद्र सरकार ने अब तक इन जिलों के जाटों को केंद्रीय ओबीसी आरक्षण नहीं दिया है। यही वजह है कि केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी है।
2024 में जयचौली आंदोलन के बाद फिर तेज हुई मांग
वर्ष 2024 में उच्चैन के पास जयचौली में हुए आंदोलन के बाद भजनलाल सरकार ने केंद्र को सिफारिशी पत्र भेजा। साथ ही एक समिति गठित कर मामला केंद्रीय ओबीसी आयोग तक पहुंचाया गया। उस समय वार्ता और आश्वासन के बाद समाधान की उम्मीद जगी, लेकिन अब तक ठोस नतीजा सामने नहीं आया।