
एसिड अटैक पीड़ितों को ट्रेन किराए में मिलेगी छूट (सांकेतिक फोटो - चैटजीपीटी)
Acid Attack Survivors Railway Travel Concession: एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह एसिड अटैक पीड़ितों को इलाज के लिए ट्रेन से सफर करने पर किराए में रियायत देने की नीति बनाने को सैद्धांतिक रूप से तैयार है। सरकार इस सुविधा को मरीजों की कैटेगरी के तहत देने पर विचार कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस मामले में उदारता से विचार करने को कहा है। कोर्ट ने सरकार को प्रस्तावित नीति का ड्राफ्ट छह हफ्ते के भीतर रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने रेलवे मंत्रालय की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि केंद्र स्तर पर बैठक हो चुकी है और एसिड अटैक सर्वाइवर्स को रेल किराए में रियायत देने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है।
हालांकि, सरकार उन्हें दिव्यांगों की अलग कैटेगरी में रखने के बजाय मरीजों की कैटेगरी में शामिल करने पर विचार कर रही है। सरकार का कहना है कि रेलवे पहले से दिव्यांग लोगों की कुछ कैटेगरी को किराए में छूट देती है। अगर एसिड अटैक सर्वाइवर्स को दिव्यांग कैटेगरी के तहत अलग सुविधा दी जाती है तो दूसरी कैटेगरी की तरफ से भी ऐसी मांग आ सकती है।
याचिकाकर्ता संस्था अतिजीवन सोसाइटी की तरफ से अदालत को बताया गया कि एसिड अटैक सर्वाइवर्स को इलाज के लिए कई बार बड़े शहरों में जाना पड़ता है। कई पीड़ितों को करीब चार से पांच साल तक बार-बार अस्पताल जाना पड़ सकता है। उनके इलाज में कई सर्जरी, आंखों से जुड़ा इलाज और लंबे समय तक देखभाल शामिल हो सकता है। दिल्ली, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के चुनिंदा अस्पतालों में इस तरह का विशेष इलाज उपलब्ध होने के कारण पीड़ितों को लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती है।
याचिका में कहा गया कि एसिड से हुए जलने के कारण पीड़ितों को लगातार खुजली और दूसरी परेशानियां हो सकती हैं। सर्जरी के बाद भी उन्हें कई बार यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में AC कोच में सफर करना उनके लिए ज्यादा सुविधाजनक होता है। लेकिन बार-बार AC टिकट का खर्च उठाना कई पीड़ितों के लिए मुश्किल होता है।
याचिका में यह भी कहा गया कि मौजूदा व्यवस्था के कारण एसिड अटैक सर्वाइवर्स को दिव्यांगों के लिए उपलब्ध आरक्षित कोटे और रेल किराए में मिलने वाली रियायत का फायदा नहीं मिल पाता।
याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि एसिड अटैक पीड़ितों को रेल यात्रा के लिए जरूरी मेडिकल सर्टिफिकेट हासिल करने में भी परेशानी होती है। कई मामलों में उन्हें इलाज करने वाले अस्पताल से प्रमाण पत्र लेने के लिए कहा जाता है। बार-बार यात्रा करने वाले पीड़ितों के लिए यह प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से यह देखने को कहा कि क्या एसिड अटैक सर्वाइवर्स को थैलेसीमिया और कैंसर जैसी बीमारियों के मरीजों की तरह मरीजों की कैटेगरी में शामिल कर रेल किराए में रियायत दी जा सकती है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र की बात सुनने के बाद मामले में प्रस्तावित नीति का ड्राफ्ट छह हफ्ते के भीतर पेश करने को कहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़ितों को राहत देने का काम समयबद्ध तरीके से होना चाहिए। इस मामले में 16 जुलाई को भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा था। तब अदालत के सामने एसिड अटैक सर्वाइवर्स को AC कैटेगरी में रेल किराए पर रियायत देने की मांग रखी गई थी।
Updated on:
13 Aug 2026 03:09 pm
Published on:
13 Aug 2026 03:05 pm
