जय प्रकाश दास समाज सेवा के क्षेत्र में पिछले 14 साल से अपने तन, मन, धन, वचन और कर्म से लगे हुए हैं। श्री बांके बिहारी सेवा समिति के बैनर तले जरुरतमंद बेटियों के सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन कर रहे हैं। वे अब तक 200 बेटियों का विवाह करा चुके हैं।
भरतपुर। वृक्ष कबहूं न फल भखै, नदी न संचय नीर। परमार्थ के कारने साधुन धरा शरीर।। इस दोहे को शहर में चरितार्थ कर रहे हैं सुभाष नगर निवासी जय प्रकाश दास। जय प्रकाश दास समाज सेवा के क्षेत्र में पिछले 14 साल से अपने तन, मन, धन, वचन और कर्म से लगे हुए हैं। श्री बांके बिहारी सेवा समिति के बैनर तले जरुरतमंद बेटियों के सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन कर रहे हैं। वे अब तक 200 बेटियों का विवाह करा चुके हैं। जिन कन्याओं के माता-पिता नहीं होते हैं, उनका कन्यादान वे स्वयं सपत्नीक करते हैं। इसके अलावा वे बीते करीब 6 साल से श्रीजी रोटी बैंक का संचालन कर रहे हैं, जिसके माध्यम से रोजाना करीब 125-150 जरुरतमंद लोगों को भोजन करा रहे हैं। इतना ही नहीं वे बीते करीब 4 साल से सुंदरकांड, रामायण और भागवत सप्ताह का निशुल्क संगीतमय कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। इन धार्मिक आयोजनों में जो चढ़ावा मिलता है, उस धन का सदुपयोग वे जरुरतमंदों के भोजन एवं बेटियों के विवाह समारोह में जरुरतों की पूर्ति के लिए करते हैं।
जय प्रकाश दास बताते हैं कि वर्ष 2010 में जब वे अपने काम से अनाह गेट बजरिया में एक दुकान पर बैठे थे तो एक महिला वहां आई, जिसने अपने आपको विधवा, बेहद गरीब एवं लाचार बताते हुए अपनी बेटी के विवाह के लिए कुछ सहयोग मांगा। उसके हालातों देखकर उनका मन द्रवित हुआ और उससे बातचीत की। महिला के घर जाकर देखा तो सारी बातें सच निकलीं। घर पहुंचकर अपनी पत्नी श्यामा गोयंका को उस बेवा महिला के परिवार के हालात और बेटी के विवाह के संबंध में बताया। इस पर पत्नी ने उस बेवा की बेटी का विवाह करने के लिए तन, मन, धन से सहयोग करने के लिए प्रेरित किया। इतना ही नहीं पत्नी ने स्वयं साथ होकर उस कन्या के विवाह में यथा संभव मदद की। उसी दिन से वे परमार्थ के मार्ग पर ऐसे चल पड़े कि फिर कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। वर्तमान में उनके कारवां में करीब 100 से अधिक ऐसे सक्रिय सदस्य हैं, जो परमार्थ के कार्य के लिए उनके साथ तत्पर रहते हैं।
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धार्मिक कार्यक्रम में नहीं की जाती यजमान से कोई डिमांड
जय प्रकाश दास बताते हैं बीते चार साल में वे 100 से अधिक सुंदरकांड पाठ, 40 से अधिक रामायण पाठ एवं 7 भागवत सप्ताह करा चुके हैं। खास बात यह है कि वे इन धार्मिक आयोजनों को आम लोगों की डिमांड पर पूरी तरह निशुल्क कराते हैं। उनकी जिजमानों से कोई पैसे की कोई डिमांड नहीं होती है। आयोजन में जिजमान अपनी स्वेच्छा से जो भेंट दक्षिणा दे देते हैं या जो श्रद्धालु भक्त जनों से चढ़ावा आता है, वे उसी से संतुष्ट रहते हैं। धार्मिक आयोजनों से जो पैसा या सामग्री उनको भगवत कृपा से प्राप्त होती है, उस धन का उपयोग वे श्री जी रोटी बैंक के संचालन एवं सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन के आयोजन में खर्च कर देते हैं। इसके अलावा वे अन्य दानदाताओं और भामाशाहों के सहयोग से अपने समाज सेवा के कार्यों को मूर्त रूप प्रदान करते हैं।