भरतपुर

इस थेरेपी से चेहरे के जटिल मुंहासों का सफल इलाज, मात्र 2 महीने में मरीज को मिली राहत

युवती 6 माह से इस रोग से पीड़ित थी एवं विभिन्न प्रकार की औषधियां लेने पर भी लाभ नहीं मिल पा रहा था, बल्कि रोग बढ़ता जा रहा था और पूरे चेहरे पर फैल गया।
2 min read
Feb 26, 2024
successful-treatment-of-complex-facial-acne-through-leech-therapy-in-bharatpur
symbolic picture

भरतपुर। जनाना अस्पताल परिसर में संचालित यूनानी चिकित्सा विभाग जयपुर के अंतर्गत प्रदेश के रेजिमेंटल थैरेपी के पहले उत्कृष्ट संस्थान में लीच थेरेपी ( इरसाल अल अलक ) के जरिए एक 23 वर्षीय महिला रोगी का सफल इलाज किया है। युवती 6 माह से इस रोग से पीड़ित थी एवं विभिन्न प्रकार की औषधियां लेने पर भी लाभ नहीं मिल पा रहा था, बल्कि रोग बढ़ता जा रहा था और पूरे चेहरे पर फैल गया। इसके चलते खुजली, दाने, रक्त और मवाद के रिसाव के कारण पपड़ी जमने लगी और रोगी को मानसिक तनाव भी महसूस होने लगा।

रोगी का इलाज डॉ. शमसुल हसन तारिक एमडी यूनानी चिकित्सा एवं प्रभारी अधिकारी के नेतृत्व में रक्त की आवश्यक जांच कराकर प्रारम्भ किया गया, जिसमें 15 दिन के अंतराल में दो से तीन लीच लगाई गई और दो माह इलाज किया गया। साथ में चेहरे को नीम के पत्तों के जोशांदे से धोने की सलाह दी, जिसको दो माह करने के बाद अब रोगी पूर्ण रूप से रोग मुक्त हो गई।

डॉ. तारिक ने बताया की लीच थैरेपी का सबसे पहला वर्णन यूनानी चिकित्सा के ग्रन्थ में मिलता है एवं प्रमुख यूनानी चिकित्सक इसका उपयोग दाद, सोरिएसिस, सफेद दाग, एक्जिमा, गठिया, पुराने ज़ख्म, दूषित रक्त को साफ करने एवं वेरिकोस वैन जैसी बीमारियों में करते आ रहे हैं। वर्तमान में प्लास्टिक सर्जन इसका प्रयोग मॉइक्रो सर्जरी में करते हैं ताकि रक्त का संचार ठीक रहे।

आम तौर से औषधीय लीच का ही प्रयोग किया जाता है, जिसको पहचान कर रोगी के शरीर पर लगा दिया जाता है। यह रक्त को चूस कर लीच खुद शरीर से अलग हो जाती है। इसके बाद मरीज की ड्रेसिंग कर दी जाती है ताकि रक्त के बहाव को रोका जा सके। टीम में डॉ. तारिक सहित डॉ. निकहत बी, डॉ. अरीबा हुसैन, कम्पाउंडर रविन्दर कुमार, रोहिताश कुमार, परिचारक बाबूलाल एवं परिचारिका पार्वती देवी का सहयोग रहा।

Published on:
26 Feb 2024 03:24 pm