भरतपुर

World cancer day 2024 : हौसलों से हारा कैंसर, खुशियों से भरी ‘सूनी कोख’, चिकित्सक के ना कहने बाद मां बनी नीतू

World cancer day 2024 : राजस्थान के भरतपुर की नीतू के लिए दुनिया उस वक्त ठहर गई जब चिकित्सकों ने कहा- आप कैंसर पीड़ित हैं। इलाज के बाद आप मां नहीं बन सकती हैं। लेकिन नीतू के हौंसले ने, आगे जाकर उन्हें ना केवल मां बनने की खुशी दी, बल्कि कैंसर जैसे गंभीर बीमारी को भी मात दिया।  
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Feb 04, 2024
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World cancer day 2024 : शादी के बंधन में बंधने के बाद पति-पत्नी सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहे थे। जिंदगी की गाड़ी खुशियों की पटरी पर दौड़ रही थी, लेकिन एक पत्नी को कुछ दिक्कत हुई और चिकित्सक को दिखाया तो पता चला कि उसे कैंसर है। इस क्षण उनकी दुनिया ठहर सी गई। खुशियों को लगी नजर से वह भी स्तब्ध रह गए, लेकिन इसे नियति मानकर उपचार कराना शुरू किया। कीमो होने के बाद भी पत्नी ने दो बच्चों को जन्म दिया है। हम बात कर रहे हैं राम नगर निवासी नीतू की। नीतू ने अपने हौसलों के दम पर कैंसर को मात दी है।

भरतपुर के रामनगर निवासी प्रहलाद की शादी वर्ष 2015 में नीतू से हुई थी। वर्ष 2018 में चिकित्सक को दिखाने पर पता चला कि नीतू कैंसर जैसी घातक बीमारी से पीड़ित है। कैंसर से नीतू को बचाने के लिए उसका उसका थैरेपी से होना था। ऐसे में नीतू के मां बनने का ख्वाब कभी पूरा नहीं होने की बात चिकित्सक ने कही।

पति ने भी यही कहा कि बच्चे नहीं होंगे तो कोई बात नहीं, लेकिन पत्नी की जिंदगी बचनी चाहिए। नीतू का उपचार करीब पांच थैरेपी से हुआ। इसके बाद नीतू स्वस्थ रहने लगी थी। इस बीच नीतू गर्भवती हो गई। यह दंपती के साथ चिकित्सक के लिए भी चमत्कार जैसा था। वजह चिकित्सकों ने नीतू के एक ओवेरी (अंडकोष) की सर्जरी कर दी, जबकि दूसरे को भविष्य के लिए छोड़ दिया था। कीमो से ओवम नष्ट होने के कारण नीतू के मां बनने की संभावना बेहद कम थीं। खास बात यह है कि दंपती को इलाज से पहले चिकित्सकों ने अंडकोष को रिवर्ज कराने की सलाह दी थी, ताकि भविष्य में वह संतान पैदा कर सकें, लेकिन पैसे के अभाव में दंपती ने मना कर दिया था, लेकिन अब नीतू ने इलाज के बाद दो बच्चों को जन्म दिया है।

नीतू ने वर्ष 2020 में बेटी को जन्म दिया है, जिसका नाम प्रियांशी रखा है। वहीं वर्ष 2022 में बेटे को जन्म दिया है, जिसका नाम गिरीश रखा है। नीतू के पति प्रहलाद कहते हैं कि हमने शुरुआत में तो उम्मीद ही छोड़ दी थी, लेनिक यह सब प्रभु की कृपा से संभव हो सका है। प्रहलाद ने कहा कि नीतू इतनी बड़ी बीमारी के बाद भी कभी हताश नहीं हुई और हौसले के साथ बीमारी का सामना किया। यही वजह है कि वह दो बच्चों को जन्म दे सकी है। प्रहलाद ने कहा कि उनके जीवन में चिकित्सक ही भगवान बनकर आए हैं।

Published on:
04 Feb 2024 01:04 pm
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