
भिलाई. बात कई साल पुरानी है। मैं 5 वीं में थी। पापा और मैं बैठकर बात कर रहे थे, तभी उन्होंने पूछा, बड़ी होकर क्या बनोगी। मैंने झट से कहा, डॉक्टर। उस वक्त देश में महिला कार्डियक सर्जन के नाम पर कोई नाम नहीं था। मैंने इरादा किया, इस कमी को दूर करना है। उसी वक्त ठान लिया। कार्डियोलॉजी में महारत हासिल करूंगी।
ख्वाहिश पूरा करने पापा ने भरी थी हामी
पापा ने भी मेरी इस ख्वाहिश को पूरा करने उसी वक्त हामी भर दी। मैंने तय किया, पापा को भरोसा दिला दिया है, इसे अब टूटने नहीं दूंगी। सोमवार को जब एम्स के नतीजे जारी हुए तो मुझे इतने साल पहले की वही बात याद आ गई। एम्स में १६५वीं रैंक मिली है, यानी एमबीबीएस का रास्ता बन गया।
एक लक्ष्य तो मैंने पा लिया है, अब एमबीबीएस के बाद सर्जन के तौर पर कार्डियो बनकर दूसरा ख्वाब भी पूरा करूंगी। छत्तीसगढ़ सहित देश में डॉक्टरों की बहुत जरूरत है। इस कमी को दूर करने किसी को तो आगे आना होगा। मैंने इसकी शुरुआत कर दी है। ये कहना है भिलाई की सौरभी झा का, जिन्हें एम्स के नतीजों में टॉप रैंकिंग मिली है।
भोपाल में मिल जाएगा प्रवेश
सौरभी ने बताया कि इस एआइआर से एम्स भोपाल में प्रवेश मिल जाएगा। असल में वह एमपी से ही अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करना चाहती है। ग्वालियर में सौरभी का ननिहाल है, ये भी एम्स भोपाल में प्रवेश लेने की एक वजह है। सौरभी ने बताया कि एम्स से एमबीबीएस करने पर आगे के रास्ते आसान हो जाते हैं।
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की तुलना में एम्स जबरदस्त एक्सपोजर देता है। बात रिसर्च की हो या फिर फर्दर स्टडी की एम्स के स्टूडेंट को विश्व स्तर पर पहचाना मिलती है। एम्स की पढ़ाई के बाद स्पेशिलाइजेशन के लिए बेहतर रास्ते बनते हैं।
एआइआर 909 मिली
एम्स के नतीजों में भिलाई के रितविक जैन को एआइआर 909 मिली है। वह नीट के रिजल्ट में स्टेट टॉपर रहे हैं। एम्स की रैंकिंग में उनका स्थान प्रदेश में दूसरा है। रितविक ने बताया कि वह भी कॉर्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता है। एमबीबीएस के बाद सर्जन की तैयारी रहेगी। टॉप-1000 में शामिल होने की वजह से इन्हें भी एम्स में प्रवेश मिलेगा।