भिलाई

इस सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल में गरीब-मजदूर वर्ग के बच्चे पढ़कर बनेंगे बाबू-साहब

सरकारी इंग्लिश मीडियम मिडिल स्कूल खुल जाने से ऐसे पालकों की उम्मीदों को पर लग गए हैं जो अंगे्रजी माध्यम में पढ़ाकर अपने बच्चों को काबिल बनाने का ख्वाब देख रहे हैं।
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Jul 24, 2018
Bhilai patrika
इस सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल में गरीब-मजदूर वर्ग के बच्चे पढ़कर बनेंगे बाबू-साहब

भिलाई. शिक्षिका श्रावणी विश्वास अंग्रेजी में कभी कुछ सवाल पूछ रही थीं तो कभी कुछ निर्देश दे रही थीं। बैंच पर कतारबद्ध बैठे उत्साहित मगर पूरी तरह अनुशासित बच्चे भी इंग्लिश में बात करने का प्रयास कर रहे थे। अंग्रेजी में शिक्षा ग्रहण करने की रुचि और खुशी इन बच्चों में साफ झलक रही थी।

शासकीय इंग्लिश मीडियम मिडिल स्कूल बालाजी नगर खुर्सीपार
यह दृश्य था शासकीय इंग्लिश मीडियम मिडिल स्कूल बालाजी नगर खुर्सीपार का। खास बात यह है कि अब तक निजी कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ रहे बच्चे टीसी निकालकर यहां सरकारी सकूल में प्रवेश लिए हैं। श्रावणी ने बताया कि हिंदी से इंग्लिश में जो बदलाव हुआ है उसे बच्चे पसंद कर रहे हैं। पहले बच्चों को अंग्रेजी में पढ़ाया जाता था, लेकिन उसे हिंदी में समझाया जाता था। अब उन्हें पूरी तरह से इंग्लिश में पढ़ाया जा रहा है और इंग्लिश में ही समझाने का प्रयास किया जा रहा है। श्रवणी के अलावा खुशबु खान और मिली तिवारी की नियुक्ति अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने के लिए की गई है। इनके अलावा क्षेत्र के राजेंद्र नाग और कोलाराजू ने शिक्षा मित्र के रूप में अपनी नि:शुल्क सेवाएं देने की इच्छा जताई है।

गरीब मां-बाप का सपना अब सच होगा
इनमें से ज्यादातर बच्चे गरीब व निम्र मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। इनके माता-पिता अपनी रोजी-मजदूरी से जैसे-तैसे फीस और कॉपी-किताब की व्यवस्था कर पा रहे थे। क्षेत्र में अब सरकारी इंग्लिश मीडियम मिडिल स्कूल खुल जाने से ऐसे पालकों की उम्मीदों को पर लग गए हैं जो अंगे्रजी माध्यम में पढ़ाकर अपने बच्चों को काबिल बनाने का ख्वाब देख रहे हैं।

विशाल अब फिर पढ़ सकेगा इंग्लिश मीडियम स्कूल में
कार्यक्रम के दौरान बापू नगर के एक प्रतिभवान छात्र विशाल पासवान के दाखिले की मांग कैबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय से की गई। विशाल ने कक्षा तीसरी तक बड़े इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाई की लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से उन्हें सरकारी स्कूल मे पढऩा पड़ा। कक्षा 5 वीं में उसने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए। हिंदी मीडियम स्कूल से होने के चलते तकनीकी कारणों के कारण उसे यहां दाखिला नही मिल रही थी। पांडेय ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को विशाल को दाखिला देने के निर्देश दिए।

Updated on:
24 Jul 2018 11:43 pm
Published on:
24 Jul 2018 11:43 pm