
ट्रक के बाद अब वैगन से ‘स्क्रैप पार’! (फोटो सोर्स- पत्रिका)
BSP Scrap Scam: भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से ट्रकों के जरिए लौह स्क्रैप और कोल चोरी के मामले में कार्रवाई के बाद अब प्लांट के आंतरिक रेलवे वैगनों से भी स्क्रैप बाहर निकाले जाने के आरोप सामने आए हैं। सूत्रों का दावा है कि सप्ताह में दो-तीन दिन वैगनों के जरिए लाखों रुपए का स्क्रैप बाहर किया जा रहा है। हालांकि बीएसपी प्रबंधन ने इन आरोपों को तथ्यात्मक नहीं बताया है।
भिलाई-3 थाना पुलिस ने ट्रकों के जरिए बीएसपी से लौह स्क्रैप और कोल चोरी के मामले में करीब 3.22 करोड़ रुपए की संपत्ति की जांच करते हुए दो बीएसपी अधिकारियों समेत 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें 16 आरोपियों के खिलाफ चालान भी पेश किया जा चुका है। इसके बावजूद प्लांट में स्क्रैप की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार वैगन में लदे स्क्रैप का वजन टीएंडडी के वे-ब्रिज पर किया जाता है। आरोप है कि वजन को संतुलित करने के लिए वैगन में पहले 8 से 10 टन पानी या अन्य भारी सामग्री भर दी जाती है। वजन के बाद इसे यार्ड में खाली कर उसकी जगह स्क्रैप लोड किया जाता है। बाद में दोबारा वजन के दौरान कथित तौर पर इसी अंतर की आड़ में स्क्रैप गायब कर दिया जाता है। सूत्रों का दावा है कि रात में यह स्क्रैप डंपर या अन्य वाहनों से प्लांट से बाहर पहुंचाया जाता है।
सूत्रों ने टीएंडडी के नापतौल उपकरणों की स्टैंपिंग पर भी सवाल उठाए हैं। दावा है कि बीएसपी में करीब दो वर्षों से कुछ नापतौल उपकरणों की स्टैंपिंग नहीं हुई है। इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। यदि यह दावा सही है तो वजन प्रक्रिया की विश्वसनीयता की भी जांच आवश्यक होगी।
उदाहरण के तौर पर यदि रात में 10 वैगन स्क्रैप लेकर भेजे गए और उनमें से कुछ से स्क्रैप निकाल लिया गया, तो आरोप है कि अगले दिन मौके पर मौजूद वैगनों के आधार पर ही सिस्टम में लिंकिंग की जाती है। ऐसे में वैगन मूवमेंट, वे-ब्रिज रिकॉर्ड, सिस्टम एंट्री, सीसीटीवी फुटेज और डिस्पैच रिकॉर्ड का मिलान जांच का अहम आधार हो सकता है।
बीएसपी की रोलिंग मिल, स्ट्रक्चरल मिल, वायर रॉड मिल, प्लेट मिल और रेल मिल में उत्पादन लगातार चलता है। उत्पादन के दौरान निकलने वाले डिफेक्टिव मटेरियल को संबंधित स्थान से हटाकर स्क्रैप यार्ड या एसएमएस-3 भेजा जाता है। इसके लिए बीएसपी का लोको इंजन वैगन लेकर पहुंचता है, स्क्रैप को डिस्पोजल यार्ड तक पहुंचाया जाता है।
बीएसपी के जनसंपर्क विभाग के अनुसार इस तरह की कोई घटना नहीं होती है और सामने आई जानकारी तथ्यात्मक नहीं है। ऐसे में वैगन मूवमेंट, वजन रिकॉर्ड, सिस्टम लिंकिंग और स्क्रैप डिस्पैच की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोप महज दावे हैं या कोई वास्तविक गड़बड़ी है।
आरोप है कि रात में वजन होने के बाद वैगनों को तत्काल सिस्टम में लिंक नहीं किया जाता। अगले दिन सुबह करीब 11 बजे उपलब्ध वैगनों की संख्या के आधार पर लिंकिंग की जाती है। इससे रात में कथित तौर पर निकाले गए स्क्रैप की मात्रा और वैगन की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर छिपाने की आशंका जताई जा रही है। पत्रिका के पास उपलब्ध एक कंप्यूटर स्क्रीनशॉट में तय क्षमता से सात टन अधिक वजन दर्ज होने का दावा किया गया है। इसकी स्वतंत्र जांच से ही स्पष्ट होगा कि यह अतिरिक्त वजन किस वजह से दर्ज हुआ।
Updated on:
28 Aug 2026 12:48 pm
Published on:
28 Aug 2026 12:48 pm
