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हेमचंद विवि में बड़ा फैसला: एफआईआर के बाद कुलसचिव से छीने वित्तीय अधिकार, जानें मामला

Bhilai News: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में एफआईआर के बाद बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। कार्यपरिषद ने कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को वित्तीय कामकाज से अलग कर दिया है।
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University Council Decision

हेमचंद विश्वविद्यालय (photo- patrika)

Hemchand Yadav University: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने एफआईआर के बाद कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को वित्तीय कामकाज से अलग कर दिया है। हाल ही में हुई बैठक में कुलसचिव को संबंधित कंडिका की चर्चा के दौरान बैठक से बाहर कर दिया गया। सदस्यों ने लिखित सहमति देकर इस निर्णय पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. नीलू श्रीवास्तव को प्रभारी सचिव बनाकर आगे की कार्यवाही की गई।

कार्यपरिषद ने तय किया कि आगामी आदेश तक विवि के वित्तीय प्रपत्रों और बैंकिंग लेनदेन में वित्त अधिकारी के साथ द्वितीय अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता अधिष्ठाता छात्र कल्याण रहेंगी। कुलसचिव के हस्ताक्षर से कोई वित्तीय लेनदेन नहीं होगा।

एफआईआर को बनाया आधार

कार्यपरिषद के संकल्प में कहा गया है कि कुलसचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद विवि के वित्तीय हित, प्रशासनिक निष्पक्षता और कामकाज की निरंतरता को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। निर्णय छग. विवि अधिनियम, 1973 की संबंधित धाराओं और विवि में लागू वित्तीय नियमों के तहत लिया गया। इसकी जानकारी उच्च शिक्षा विभाग केआयुक्त को भी भेजी गई है।

दस्तावेजों से छेड़छाड़ की आशंका

विवि ने आयुक्त को भेजे पत्र में कहा कि कुलसचिव के खिलाफ विवि की निधि में अनियमितता का मामला जांच में है। ऐसे में भुगतान, बैंकिंग, वेतन वितरण, क्रय और अभिलेखों की अभिरक्षा की जिम्मेदारी उन्हीं के पास रहना संस्थागत दृष्टि से उचित नहीं होगा। पत्र में विवि के अभिलेखों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई गई है।

आयुक्त से मांगा था मार्गदर्शन

मोहन नगर थाने में तीन अगस्त को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(4) के तहत कुलसचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा संचालनालय के आयुक्त को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा। पत्र में कहा गया कि कुलसचिव वित्तीय देयकों, नस्तियों और प्रपत्रों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, जबकि एफआईआर के बाद जमानत पर होने के कारण ऐसे वित्तीय कार्य किए जाने पर नियमों के तहत स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।