
Bhilai Nagar Nigam 2026: भिलाई नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आरक्षण की घोषणा के बाद कई मौजूदा पार्षदों और प्रमुख राजनीतिक नेताओं के सामने अब अपने ही वार्ड से चुनाव लड़ने को लेकर स्थिति बदल गई है। कई वार्ड अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षित होने के कारण नेताओं को अब नए वार्ड की तलाश करनी पड़ सकती है। आरक्षण का असर भिलाई के महापौर नीरज पाल और निगम के उपनेता प्रतिपक्ष व भाजपा नेता दया सिंह के चुनावी समीकरण पर भी पड़ता नजर आ रहा है। इसके अलावा कुछ जोन अध्यक्षों के वार्ड भी आरक्षण की सूची में आने की चर्चा है।
भिलाई निगम के उपनेता प्रतिपक्ष दया सिंह के मौजूदा वार्ड को OBC के लिए आरक्षित किया गया है। ऐसे में उनके लिए इस वार्ड से दोबारा चुनाव लड़ने की राह मुश्किल हो गई है। अब उन्हें आरक्षण के नियमों के मुताबिक किसी दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की रणनीति बनानी पड़ सकती है। वहीं, महापौर नीरज पाल के लिए भी आरक्षण के बाद चुनावी समीकरण बदल गए हैं। अगर उनका वर्तमान वार्ड उनके लिए चुनाव लड़ने के अनुकूल नहीं रहता है, तो उन्हें भी दूसरे वार्ड से चुनाव मैदान में उतरना पड़ सकता है।
भिलाई नगर निगम चुनाव 2026 के लिए कुल 23 वार्ड OBC वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें 8 वार्ड OBC महिला और 15 वार्ड OBC सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित बताए गए हैं। OBC आरक्षित वार्डों में वार्ड 42 गौतम नगर खुर्सीपार, वार्ड 7 राधिका नगर, वार्ड 21 कैलाश नगर कुरूद, वार्ड 56 सेक्टर-2 पश्चिम, वार्ड 26 रामनगर मुक्तिधाम, वार्ड 6 प्रियदर्शिनी परिसर, वार्ड 40 शहीद चुम्मन यादव नगर छावनी, वार्ड 19 राजीव नगर कोहका, वार्ड 39 चंद्रशेखर आजाद नगर और वार्ड 45 बालाजी नगर खुर्सीपार शामिल हैं।
इसके अलावा वार्ड 66 सेक्टर-7 पूर्व, वार्ड 27 शास्त्री नगर, वार्ड 10 लक्ष्मी नगर, वार्ड 68 सेक्टर-8, वार्ड 3 मॉडल टाउन, वार्ड 46 दुर्गा मंदिर खुर्सीपार, वार्ड 37 संत रविदास नगर, वार्ड 38 सोनिया गांधी नगर, वार्ड 54 सेक्टर-1 दक्षिण, वार्ड 49 सुभाष मार्केट, वार्ड 4 नेहरू नगर, वार्ड 2 स्मृति नगर और वार्ड 44 लक्ष्मीनारायण वार्ड को भी OBC वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।
वार्ड आरक्षण की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों के सामने प्रत्याशी चयन की चुनौती बढ़ गई है। जिन मौजूदा पार्षदों के वार्ड आरक्षित हो गए हैं, उन्हें अब नए वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी करनी पड़ सकती है। दूसरी ओर, पार्टी के ऐसे नेताओं की दावेदारी भी प्रभावित होगी, जो लंबे समय से किसी खास वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। अब पार्टियों को नए सिरे से उम्मीदवारों के नाम पर मंथन करना होगा। ऐसे में आरक्षण के बाद भिलाई निगम चुनाव का राजनीतिक समीकरण आने वाले दिनों में और दिलचस्प होने की संभावना है।